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अष्टमी पर महाकाल दरबार में आस्था का सैलाब, भस्म आरती देखने श्रद्धालु उमड़े

A Deluge of Faith at the Mahakal Darbar on Ashtami; Devotees Flock to Witness the Bhasma Aarti.

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर गुरुवार को उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में भक्तों का सैलाब देखने को मिला। सुबह की भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उमड़े। पूरा मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। भक्त ब्रह्म मुहूर्त से ही लंबी लाइनों में खड़े होकर बाबा के दर्शन के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे। सबसे पहले भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा पहले बाबा का जलाभिषेक किया गया और बाद में पंचामृत से स्नान करवाया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
यह आरती वैराग्य और मृत्यु के सत्य का प्रतीक है। बाबा पर चढ़ने वाली भस्म कपिला गाय के कंडों की राख, पलाश, बड़, पीपल और बेर की लकड़ियों को जलाकर विशेष रूप से तैयार की जाती है। आरती के दौरान शिवलिंग पर लगभग ढाई किलो भस्म चढ़ाई जाती है, जिससे बाबा महाकाल को जगाने की परंपरा पूरी की जाती है।
भस्म आरती के दौरान महिलाएं घूंघट करती हैं और पुरुषों को धोती पहननी होती है। इसके बाद पूरा मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। भक्तों ने ‘हर हर महादेव’ और ‘ऊं नमः शिवाय’ के जयकारे लगाए। बाबा का अद्भुत शृंगार हुआ। भक्त बाबा का अद्भुत शृंगार देखकर खुशी से गदगद दिखे। बाबा का श्रृंगार करने के लिए उनके माथे पर चांदी का सुंदर त्रिपुंड लगाया गया, फूलों की मालाएं, बेलपत्र, चंदन और अन्य पूजा सामग्री से बाबा को सजाया गया। फिर, बाद में महाकाल की कपूर आरती की गई और उसके बाद उन्हें भोग लगाया गया। हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है। वहीं, भस्म आरती देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। उज्जैन महाकाल एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जिसे ‘मृत्यु लोक का राजा’ माना जाता है। यहां की विश्व प्रसिद्ध ‘भस्म आरती’ और नया ‘महाकाल लोक’ कॉरिडोर आकर्षण के मुख्य केंद्र हैं।

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