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घबराने की जरूरत नहीं, भारत किसी भी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए तैयार: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल

No Need to Panic; India Is Prepared to Tackle Any Energy Crisis: Union Minister Manohar Lal

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को कहा कि जहां एक ओर वैश्विक संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव पेट्रोलियम उत्पादों और गैस की आपूर्ति के लिए संभावित खतरा पैदा करते हैं, वहीं भारत ऐसी किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और फिलहाल ‘घबराने की कोई जरूरत नहीं है।’
पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा आपूर्ति का मुद्दा सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बढ़ती हुई अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय है; खासकर कई देशों के बीच चल रहे संघर्षों को देखते हुए, जिनसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो सकती हैं।
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ भारत का ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का भी एक मुद्दा है। एक बड़ी समस्या जो हम देख रहे हैं, वह यह है कि कुछ देश आपस में युद्ध में उलझे हुए हैं, जिसका असर पेट्रोलियम उत्पादों और गैस की आपूर्ति पर काफी पड़ सकता है, क्योंकि हम उन्हें वहीं से आयात करते हैं।” हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने यह भरोसा दिलाया कि मौजूदा स्थिति स्थिर बनी हुई है और आपूर्ति में तत्काल कोई रुकावट नहीं है। उन्होंने आगे कहा, “अभी सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है और कोई समस्या नहीं है।”
तैयारी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “एक कहावत है कि ‘सबसे अच्छे की उम्मीद करो, लेकिन सबसे बुरे के लिए भी तैयार रहो।’ सरकार ने अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करने पर भी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। जब भी कोई समस्या आती है, तो हमें उसके लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। इसीलिए भारत सरकार ने हर तरह की तैयारियां कर रखी हैं। अगर भविष्य में कोई कठिनाई आती भी है, तो भी हम आसानी से उसका कोई न कोई हल निकाल लेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत के पास इस समय जरूरी ईंधनों और संबंधित संसाधनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा, “हमारे पास इस समय पर्याप्त स्टॉक है, चाहे वह पेट्रोल हो, एलपीजी हो, या फिर ऐसी ही दूसरी चीजें जिन्हें हम विदेशों से आयात करते हैं। हम हर पहलू से पूरी तरह तैयार हैं।”
इस तैयारी को आत्मनिर्भरता के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए, मनोहर लाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान का जिक्र किया। उन्होंने समझाया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ है अपनी घरेलू क्षमताओं को इतना मजबूत बनाना कि बाहरी स्रोतों पर हमारी निर्भरता कम हो जाए।
उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए है, क्योंकि प्रधानमंत्री ने कहा है कि हमें एक ‘आत्मनिर्भर भारत’ का निर्माण करना है। आत्मनिर्भरता का सीधा सा मतलब यह है कि हम अपनी जरूरतों के लिए खुद ही पूरी तरह से सक्षम और आत्मनिर्भर हों।” उन्होंने देशों के बीच आपसी व्यापार की मौजूदा व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला और बताया कि भारत अपनी जरूरतों के हिसाब से चीजों का आयात और निर्यात, दोनों ही करता है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश किसी भी प्रतिकूल या मुश्किल हालात का सामना करने में पूरी तरह से सक्षम है।
उन्होंने कहा, “अभी देशों के बीच एक व्यावहारिक आदान-प्रदान की व्यवस्था चल रही है। कुछ चीजें हम उनसे आयात करते हैं, तो कुछ चीजें वे हमसे लेते हैं। लेकिन, अगर भविष्य में हालात बिगड़ते भी हैं, तो भी हम हर तरह से उनका सामना करने में पूरी तरह से सक्षम हैं। घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि अगर कोई भी मुश्किल आती है, तो हम स्थिति को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।”

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