छत्तीसगढ़राज्य

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का बड़ा प्लान: छत्तीसगढ़ के हाइवे पर बनेंगे ‘आरोग्य वन’

National Highways Authority's Major Plan: 'Arogya Vans' to be Developed Along Chhattisgarh's Highways

रायपुर। 10 अप्रैल 2026 राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने देशभर के 11 राज्यों के लिए पहले चरण का प्लान जारी किया है, जिसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है। इस प्लान के अनुसार आगामी मानसूनी सीजन में सभी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सघन पौधरोपण किए जाएंगे। इसके लिए स्थान चिन्हांकित कर लिए गए हैं।
देशभर में नेशनल हाइवे के किनारे प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाने के साथ खाली पड़ी जमीन को सुरक्षित रखने के लिए एनएचएआई ने अनोखा प्लान जारी किया है। इसके जरिए देश में पर्यावरण सुधार में भी मदद मिलेगी। प्राधिकरण ने सभी हाइवे पर आरोग्य वन बनाने का फैसला किया है और इसके लिए उन प्रजातियों के पौधों की सूची बना ली गई है, जिनका रोपण किया जाना है। इन पौधों के जरिए पक्षियों को भी सहरा मिलेगा और जैव विविधता तंत्र मजबूत होगा। पहले चरण में देशभर में 62.8 हेक्टेयर में 17 भूखंडों को चिन्हित कर विस्तृत कार्ययोजना बना ली गई है। इसमें छत्तीसगढ़ के नेशनल हाइवे भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के अलावा प्राधिकरण ने पहले चरण में मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र को शामिल किया है। इन सभी राज्यों में हाइवे के किनारे करीब 67,462 औषधीय पौधे लगाने की योजना है। औषधीय पौधों सहित प्राधिकरण ने नीम, आंवला, इमली, जामुन, नींबू, गूलर, मौलसरी जैसे 36 प्रजातियों की पहचान की है। इन्हें राज्यों की जलवायु और उपलब्ध रिक्त जमीन के हिसाब से लगाया जाएगा।
इन जगहों को प्राथमिकता
प्लान में छत्तीसगढ़ के भूखंडों की पहचान कर ली गई है, जहां आगामी बारिश में पौधे लगाने का अभियान शुरू होना है। इनमें मुख्य रूप से टोल प्लाजा, सड़क किनारे वाहन चालकों की सुविधा के अनुसार, इंटरचेंजों, क्लोवरलीफ जंक्शनों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रमुख स्थानों के पास खाली पड़े बड़े भूखंडों को शामिल किया गया है।
88 हेक्टेयर में पौधों पर देंगे ध्यान
प्राधिकरण ने अपने प्लान में अभी कुल 188 हेक्टेयर भूखंड को शामिल किया है। हाइवे पर देशी और मिश्रित प्रजाति के पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही हाइवे के किनारे लगे पौधों को जीवित बचाने का भी प्लान इसमें शामिल किया गया है। प्राधिकरण का कहना है कि ऐसा कर आयुर्वेद की पुरानी पद्धति को बढ़ावा देने और स्वदेशी औषधीय वनस्पति को संरक्षित करने की दिशा में काम किया जाएगा। आरोग्य वन का उद्देश्य देशभर में हरित गलियारों का नेटवर्क भी बढ़ाना है, जिससे सड़क किनारे औषधीय पौधों की समृद्ध विरासत विकसित हो सकेगी।

 

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