छत्तीसगढ़राज्य

व्हीलचेयर बनी पूनम के लिए नई उम्मीद, समाज कल्याण विभाग की पहल से आसान हुआ जीवन

Wheelchair brings new hope for Poonam; life made easier through Social Welfare Department's initiative.

रायपुर: छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजनों को सम्मानजनक और सुगम जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में समाज कल्याण विभाग की संवेदनशील पहल लगातार सकारात्मक बदलाव ला रही है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम चापाटोला निवासी पूनम रावटे को विभाग द्वारा व्हीलचेयर उपलब्ध कराए जाने से न केवल उनका आवागमन आसान हुआ है, बल्कि उनकी मां बीना बाई रावटे के जीवन में भी बड़ी राहत और नई उम्मीद लौटी है।
पूनम 80 प्रतिशत दिव्यांगता से प्रभावित हैं और बहु-दिव्यांगता की श्रेणी में आती हैं। वे बोल नहीं सकतीं और अपनी बात स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में भी असमर्थ हैं। उनकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां श्रीमती बीना बाई पर है, जो वर्षों से अपनी बेटी की हर जरूरत पूरी करने के लिए निरंतर संघर्ष कर रही थीं।
पूनम के लिए सबसे बड़ी समस्या उनका आवागमन था। घर से बाहर किसी भी कार्य के लिए उन्हें ले जाना मां के लिए अत्यंत कठिन होता था। कई बार श्रीमती बीना बाई को अपनी बेटी को गोद में उठाकर लंबी दूरी तक चलना पड़ता था। इससे न केवल उन्हें शारीरिक परेशानी होती थी, बल्कि बेटी की स्थिति देखकर वे मानसिक रूप से भी बेहद व्यथित रहती थीं।
आर्थिक सीमाओं और संसाधनों के अभाव में वे अपनी बेटी के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं कर पा रही थीं। मां की सबसे बड़ी चिंता यही थी कि पूनम को थोड़ी सहजता और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिल सके।
इसी बीच उन्हें जानकारी मिली कि समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों के लिए विशेष शिविर आयोजित किया जा रहा है। अपनी बेटी को लेकर वे शिविर पहुंचीं, जहां पूनम की दिव्यांगता का परीक्षण किया गया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी 80 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाणित की गई।
शिविर में बीना बाई ने पूनम के लिए व्हीलचेयर की आवश्यकता बताई। विभाग द्वारा त्वरित प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई।
व्हीलचेयर मिलने के बाद पूनम का दैनिक जीवन पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। अब उन्हें हर जगह गोद में उठाकर ले जाने की मजबूरी नहीं रही। घर से बाहर जाना, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन अधिक सुगम हो गया है।
बीना बाई भावुक होकर बताती हैं कि पहले बेटी को गोद में लेकर आना-जाना पड़ता था। उसकी हालत देखकर मन बहुत दुखी होता था। व्हीलचेयर मिलने के बाद बहुत राहत मिली है। अब उसे साथ लेकर कहीं भी जाना आसान हो गया है। यह हमारे परिवार के लिए बहुत बड़ी सहायता है।
पूनम को मिली व्हीलचेयर केवल एक सहायक उपकरण नहीं, बल्कि दिव्यांगजन और उनके परिवार के लिए सम्मान, सुविधा और आत्मविश्वास का माध्यम बनी है। यह पहल दर्शाती है कि शासन की योजनाएं जरूरतमंदों तक पहुंचकर उनके जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं।
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम दिव्यांगजनों की गतिशीलता बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और परिवारों की दैनिक कठिनाइयों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बीना बाई ने अपनी बेटी के जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
राज्य सरकार का लक्ष्य दिव्यांगजनों को केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना है। पूनम रावटे की यह कहानी बताती है कि समय पर मिली छोटी-सी सहायता भी किसी परिवार के लिए नई शुरुआत और बेहतर भविष्य की मजबूत आधारशिला बन सकती है।

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