छत्तीसगढ़राज्य

बुजुर्ग महिला किसान की चौखट पर पहुंचा प्रशासन, घर बैठे हुआ एग्रीस्टैक पंजीयन

Administration reaches elderly woman farmer's doorstep; AgriStack registration completed at home.

रायपुर,11 अगस्त 2026 डिजिटल शासन की सबसे बड़ी सफलता तब मानी जाती है जब तकनीक आम नागरिक के लिए सुविधा बन जाए। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के महादेवपुर गांव में ऐसी ही एक संवेदनशील पहल देखने को मिली, जहां वृद्ध महिला किसान बोगी बाई को एग्रीस्टैक पंजीयन के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। प्रशासनिक टीम स्वयं उनके घर पहुंची और मौके पर ही पंजीयन की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई।
उम्र के इस पड़ाव पर खेती ही बोगी बाई की आजीविका का प्रमुख आधार है। उनके खेत में उगने वाला धान पूरे वर्ष की आर्थिक उम्मीद से जुड़ा है। जब उन्हें जानकारी मिली कि एग्रीस्टैक पंजीयन नहीं होने पर डिजिटल क्रॉप सर्वे, धान बिक्री और कृषि से जुड़ी विभिन्न सुविधाओं के लाभ में कठिनाई आ सकती है, तो स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ गई। डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी और तकनीकी संसाधनों की कमी उनके लिए बड़ी बाधा थी।
महादेवपुर निवासी बोगी बाई के पास लगभग 6.87 हेक्टेयर कृषि भूमि है। प्रशासनिक टीम ने उनकी स्थिति को समझते हुए घर पहुंचकर आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया और एग्रीस्टैक पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें डिजिटल कृषि व्यवस्था से जोड़ दिया। जिस प्रक्रिया को लेकर वे चिंतित थीं, उसके पूरा होने के बाद उनके चेहरे पर राहत और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जिले में डोर-टू-डोर एग्रीस्टैक पंजीयन अभियान संचालित किया जा रहा है। विशेष रूप से रामानुजगंज अनुभाग में राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम गांव-गांव पहुंचकर किसानों का पंजीयन सुनिश्चित कर रही है। महादेवपुर गांव में 159 किसानों की पहचान की गई है, जिनमें से अधिकांश किसानों का पंजीयन पूरा किया जा चुका है। शेष 49 किसानों का पंजीयन भी शीघ्र पूर्ण करने की कार्रवाई जारी है।
एग्रीस्टैक के माध्यम से किसानों की भूमि, फसल और कृषि संबंधी जानकारी को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है, जिससे डिजिटल क्रॉप सर्वे, कृषि योजनाओं, अनुदान, बीमा और अन्य सुविधाओं की पहुंच अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और सुगम बन सके। इस कार्य की निगरानी अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार और राजस्व अधिकारियों द्वारा लगातार मैदानी स्तर पर की जा रही है। शिविरों के साथ-साथ घर-घर पहुंचकर पंजीयन कराने की व्यवस्था यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी किसान तकनीकी कारणों से सरकारी सुविधाओं से वंचित न रहे।
महादेवपुर की यह पहल केवल एक महिला किसान की सहायता भर नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि सरकार की डिजिटल व्यवस्था को किसान की सुविधा के अनुरूप मानवीय और सहज बनाया जा रहा है। जहां मोबाइल, इंटरनेट और ऑनलाइन प्रक्रियाएं ग्रामीण बुजुर्गों के लिए कठिन हो सकती हैं, वहां प्रशासन स्वयं उनकी चौखट तक पहुंचकर समाधान उपलब्ध करा रहा है।

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