छत्तीसगढ़राज्य

दुर्गम पहाड़ी गांव सरुवत में आंगनबाड़ी की नई शुरुआत, बच्चों को मिला सुरक्षित और सुविधायुक्त केंद्र

New Anganwadi launched in the remote mountain village of Saruvat; children gain access to a safe and well-equipped center.

रायपुर ,11 अगस्त 2026 छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आंगनबाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव के रूप में दिखाई दे रहे हैं। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सरुवत इसका प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है, जहां वर्षों तक किराये के कमरे में संचालित होने वाली आंगनबाड़ी अब अपने नवीन भवन में बच्चों के समग्र विकास का केंद्र बन गई है।
पहाड़ों के बीच बसे इस गांव में लंबे समय तक स्थायी भवन के अभाव में बच्चों और गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को आंगनबाड़ी सेवाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती थी। सीमित स्थान और संसाधनों के बीच संचालित केंद्र में पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण और प्रारंभिक शिक्षा गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित करना चुनौतीपूर्ण था। स्थायी भवन की आवश्यकता को देखते हुए शासन की विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से इसका समाधान किया गया।
वर्ष 2025-26 में विकसित भारत-जी रामजी योजना, 15वें वित्त आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को एक साथ जोड़कर सरुवत में 11.69 लाख रुपये की लागत से नवीन आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत किया गया। भवन निर्माण के लिए विकसित भारत-जी रामजी योजना से 8 लाख रुपये, 15वें वित्त आयोग से 1.69 लाख रुपये तथा महिला एवं बाल विकास विभाग से 2 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई। योजनाओं के प्रभावी अभिसरण से गांव की वर्षों पुरानी आवश्यकता का स्थायी समाधान संभव हो सका।
सरुवत का क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत दुर्गम है। निर्माण सामग्री को भवन स्थल तक पहुंचाना भी कठिन कार्य था। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ग्राम पंचायत और स्थानीय समुदाय ने निर्माण कार्य को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध ढंग से पूरा कराया। निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप मार्च 2026 में भवन का निर्माण निर्धारित समय से पहले पूर्ण कर लिया गया।
नया भवन अब केवल बच्चों के बैठने की जगह नहीं, बल्कि पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और समग्र विकास के लिए सुरक्षित एवं सुविधायुक्त केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। यहां 6 माह से 6 वर्ष तक आयु वर्ग के 47 बच्चे नियमित रूप से आते हैं और खेल-खेल में सीखने, पोषण संबंधी गतिविधियों तथा प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही 9 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं भी केंद्र की सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रही हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जयमुनी गोंड बच्चों और माताओं से नियमित रूप से संपर्क कर पूरक पोषण, स्वास्थ्य परामर्श, टीकाकरण संबंधी जानकारी और प्रारंभिक शिक्षा गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। पहले जहां किराये के भवन में सीमित सुविधाओं के कारण गतिविधियां प्रभावित होती थीं, वहीं अब बच्चों को सीखने, खेलने और सहज वातावरण में समय बिताने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित स्थान उपलब्ध है।
स्थानीय माताओं के लिए भी यह परिवर्तन राहत और भरोसे का कारण बना है। आंगनबाड़ी में आने वाली बालिका वर्षा की मां राजमती बताती हैं कि पहले बच्चों को आंगनबाड़ी भेजते समय चिंता रहती थी, लेकिन अब नया भवन बनने से सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिला है। बच्चों की देखभाल और गतिविधियां व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही हैं, जिससे अभिभावकों का विश्वास बढ़ा है।
सरुवत की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि योजनाओं के प्रभावी अभिसरण, ग्राम पंचायत की सक्रिय भागीदारी और स्थानीय स्तर पर निरंतर प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में भी बाल विकास सेवाओं को मजबूत बनाया जा सकता है। किराये के कमरे से अपने भवन तक पहुंची यह आंगनबाड़ी आज गांव के नौनिहालों के लिए सुरक्षित बचपन, बेहतर पोषण और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन चुकी है।

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