छत्तीसगढ़राज्य

“सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है” – मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

“Delivering the benefits of government schemes to the last mile is our top priority.” – Minister Lakshmi Rajwade

रायपुर, 17 अप्रैल 2026 महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े उत्तर बस्तर कांकेर जिले के प्रवास के दौरान दुर्गूकोंदल विकासखंड के दूरस्थ ग्राम डांगरा पहुंचीं। यहां उन्होंने हाई स्कूल परिसर में कुसुम पेड़ के नीचे ‘बाल चौपाल’ लगाकर ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर आत्मीय एवं अनौपचारिक संवाद किया। इस अवसर पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा तथा राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत भी उपस्थित रहीं।
मंत्री राजवाड़े ने ग्रामीण महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन रही हैं, साथ ही उनकी दैनिक जरूरतों की पूर्ति भी सहज हो रही है। उन्होंने कहा कि नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ बनने के बाद अब राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों को और अधिक गति दी जा रही है, जिससे दूरस्थ अंचलों तक बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर तेजी से पहुंच रहे हैं।
उन्होंने गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से संतुलित आहार, अतिरिक्त पोषण, प्रोटीन और विटामिन लेने की सलाह देते हुए कहा कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ समाज की नींव होती है। उन्होंने महिलाओं से विभागीय योजनाओं तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों के बीच विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं रचनात्मक गतिविधियां आयोजित कराईं। मंत्री राजवाड़े ने प्रतिभागी बालिकाओं को अपने हाथों से पुरस्कार वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। बच्चों के लिए आयोजित गतिविधियों में गुड टच-बैड टच, लोकगीत, लोकनृत्य, व्यक्तित्व विकास एवं दैनिक जीवन से जुड़ी प्रतियोगिताएं शामिल रहीं, जिनमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
बाल चौपाल में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल मंत्री राजवाड़े ने तीन नौनिहालों का अन्नप्राशन कराया। उन्होंने ग्राम डांगरा की सुकारो बाई की 5 माह की पुत्री रूही नरेटी को गोद में लेकर रेडी टू ईट से बनी खीर खिलाई। इसी तरह वामिका उइके एवं लावण्या गावड़े का भी अन्नप्राशन संपन्न कराया। इसके साथ ही पांच शिशुवती माताओं को सुपोषण टोकरी भेंट कर कुपोषण मुक्ति का संदेश दिया।
इस अवसर पर पांच बच्चों—विधाना मरकाम, प्रियांशी कुरेटी, विकास हिड़को, ग्रेसी निषाद और रियांशी तेता—को विद्यारंभ संस्कार प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के दौरान महतारी वंदन योजना से जुड़ी 68 महिलाओं का ई-केवायसी अपडेट मौके पर ही सफलतापूर्वक किया गया, जिससे योजनाओं का लाभ निर्बाध रूप से मिल सके।
कार्यक्रम के उपरांत मंत्री राजवाड़े, डॉ. शर्मा एवं राजपूत ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और बच्चों के साथ पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर सामूहिक भोज किया। पारंपरिक दोना-पत्तल में दाल, चावल, कुल्थी की सब्जी और मड़िया पेज जैसे स्थानीय व्यंजन परोसे गए, जिससे कार्यक्रम में आत्मीयता और स्थानीय संस्कृति की झलक देखने को मिली।
प्रवास के दौरान मंत्री राजवाड़े ने भानुप्रतापपुर के ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित पुनर्वास केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां रह रही महिलाओं से संवाद कर उनका हालचाल जाना, प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी ली और उनकी समस्याएं सुनकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। साथ ही केन्द्र में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।
इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन, एसडीएम भानुप्रतापपुर जीडी वाहिले, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

 

 

 

 

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