छत्तीसगढ़राज्य

भारत में बारिश की कमी घटकर हुई 12%, अगस्त में अल-नीनो का खतरा

Rainfall deficit in India narrows to 12%; El Niño threat looms for August.

नई दिल्ली। डोलैट कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे भारत में बारिश की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। हालांकि जलाशयों में पानी का भंडार बढ़ने के साथ-साथ, निकट भविष्य में मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अल नीनो का जोखिम अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह बारिश के दायरे में सुधार हुआ है, लेकिन बारिश के वितरण में श्रेणियों के हिसाब से बदलाव देखने को मिला।
कम बारिश वाले इलाकों का हिस्सा एक सप्ताह पहले के 40 प्रतिशत से घटकर 36 प्रतिशत हो गया, जबकि बहुत कम बारिश वाले इलाकों की संख्या शून्य रही। वहीं, अधिक बारिश वाले इलाकों का हिस्सा पिछले सप्ताह के महज 1 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया। हालांकि, सामान्य बारिश वाले इलाकों का हिस्सा 57 प्रतिशत से घटकर 51 प्रतिशत रह गया। डोलैट कैपिटल के अनुसार, यह सुधार मुख्य रूप से अधिक बारिश वाले इलाकों की वजह से हुआ, न कि कम बारिश वाले क्षेत्रों के सामान्य स्थिति में आने से। इससे स्पष्ट होता है कि देश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हुई, न कि बारिश के वितरण में व्यापक सुधार हुआ।
रिपोर्ट में कहा गया है, “आगे देखें तो, आईएमडी का निकट-अवधि का अनुमान मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश का संकेत देता है, हालांकि मजबूत होते अल-नीनो और लगभग न्यूट्रल आईओडी के कारण अगस्त में भी मौसमी जोखिम बना हुआ है।”
इस बीच सप्ताह के दौरान खरीफ की बुवाई में और प्रगति हुई। 31 जुलाई तक कुल बुवाई का रकबा 894.2 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 920.7 लाख हेक्टेयर था। पिछले साल की तुलना में बुवाई के अंतर में कमी आई, हालांकि फसल-वार रुझान मिले-जुले रहे। तिलहन के मामले में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला। सीजन के अधिकांश समय पीछे रहने के बाद अब यह पिछले साल की तुलना में मामूली बढ़त की स्थिति में आ गया है। बुवाई 172.3 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 171.1 लाख हेक्टेयर थी।
इस तरह, पिछले सप्ताह 3.4 लाख हेक्टेयर की कमी से स्थिति बदलकर 1.2 लाख हेक्टेयर की मामूली बढ़त में बदल गई।मोटे अनाज ने भी अपने अंतर को काफी हद तक कम कर लिया है। हालांकि, हाल के हफ्तों में तेजी के संकेत मिलने के बावजूद धान की बुआई पिछले साल की रफ्तार से थोड़ी और पिछड़ गई। दालों की बुआई में मामूली सुधार हुआ, जबकि गन्ने के रकबे में कोई बदलाव नहीं हुआ।

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