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‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ का पहला चरण सफल

First phase of ‘Mera Resham Mera Abhiman 2.0’ successful

रायपुर: वैज्ञानिक मार्गदर्शन से तसर रेशम उत्पादन को आधुनिक तकनीक, रोग नियंत्रण और बेहतर कीट प्रबंधन के जरिए नई गति मिलेगी। इससे रेशम की गुणवत्ता सुधरेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में इजाफा होगा। राज्य शासन की अनुदान आधारित योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों को कम लागत पर गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग भी लगातार दिया जाएगा, ताकि तसर पालन को बढ़ावा मिले और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण आजीविका और किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी दिशा में केंद्रीय रेशम बोर्ड, भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ के तहत बीजापुर जिले में पहले प्रीपरेटरी चरण का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया।
इस योजना का उद्देश्य वैज्ञानिक पद्धति से तसर रेशम उत्पादन बढ़ाना, हितग्राहियों की उत्पादकता में सुधार करना और उनकी आय में लगातार वृद्धि सुनिश्चित करना है। योजना की खास बात यह है कि प्रत्येक चयनित जिले के लिए एक वैज्ञानिक की नियुक्ति की जाती है, जो पूरे फसल चक्र के दौरान हितग्राहियों के साथ लगातार संपर्क में रहकर तकनीकी मार्गदर्शन देते हैं। साथ ही तसर पालन से जुड़ी समस्याओं का मौके पर समाधान भी सुनिश्चित किया जाता है। इससे हितग्राहियों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का सीधा लाभ मिलता है और उत्पादन की गुणवत्ता तथा मात्रा दोनों में सुधार होता है।
वर्ष 2026-27 के लिए बीजापुर जिले में इस योजना के क्रियान्वयन हेतु एसएमटीसी चेन्नूर (तेलंगाना) की वैज्ञानिक रम्या का चयन किया गया है। वे पूरे उत्पादन चक्र के दौरान हितग्राहियों को प्रशिक्षण, तकनीकी परामर्श, फसल प्रबंधन और उत्पादन संबंधी समस्याओं के समाधान में सहयोग देंगी। पहले चरण में हितग्राहियों को खाद्य पौधों का प्रबंधन, स्वस्थ डिम्ब समूहों का पालन, नर्सरी विकास, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा आधुनिक तसर उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही आगामी उत्पादन सत्र की तैयारियों की समीक्षा कर विस्तृत कार्ययोजना भी बनाई गई।
योजना के आगामी चरणों में भी हितग्राहियों को नियमित प्रशिक्षण, वैज्ञानिक सहयोग और तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। इससे बीजापुर जिले में तसर रेशम उत्पादन को नई गति मिलने के साथ-साथ हितग्राहियों की आय, आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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