छत्तीसगढ़राज्य

कुपोषण के खिलाफ सारंगढ़-बिलाईगढ़ की मुहिम रंग लाई, 88 बच्चों को मिली सुपोषण की राह

Sarangarh-Bilaigarh's campaign against malnutrition bears fruit; 88 children set on the path to good nutrition.

​रायपुर: कुपोषण जैसी गंभीर समस्या को दूर करने में मजबूत प्रशासनिक समन्वय और विभागों का आपसी तालमेल सबसे बड़ा हथियार साबित होता है, जिससे जमीनी स्तर पर योजनाओं का सही लाभ जरूरतमंद बच्चों और माताओं तक पहुंचता है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की माताओं की गोद में अब केवल ममता ही नहीं, बल्कि अपने बच्चों की बेहतर सेहत का भरोसा भी झलक रहा है। कुपोषण के खिलाफ शुरू की गई सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रशासन की एक मुहिम अब जमीनी स्तर पर रंग लाने लगी है। कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन और महिला एवं बाल विकास विभाग के निरंतर प्रयासों से जिले के 175 आंगनबाड़ी केंद्रों के 88 बच्चे कुपोषण के अंधकार से बाहर निकलकर पूरी तरह ‘सुपोषित’ श्रेणी में शामिल हो चुके हैं।
​यह सफलता किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति की देन है। अभियान की शुरुआत जून 2026 में ‘पोषण ट्रैकर एप’ के आंकड़ों के गहन विश्लेषण से हुई। डेटा के आधार पर जिले के करीब 200 आंगनबाड़ी केंद्रों की पहचान की गई, जिन्हें मैदानी पर्यवेक्षकों के सत्यापन के बाद घटाकर 175 संवेदनशील केंद्रों में तब्दील किया गया। ​बच्चों की नियमित सेहत, खान-पान और फॉलो-अप को सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को इन केंद्रों की सीधी जिम्मेदारी दी गई। वहीं, जिन 15 केंद्रों में कुपोषित बच्चों की संख्या सबसे अधिक थी, उनकी विशेष देख-रेख की कमान रेडक्रॉस सोसायटी को सौंपी गई।
अभियान को केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित न रखकर बहुआयामी रूप दिया गया। अति गंभीर कुपोषित बच्चों को तुरंत चिह्नित कर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजा गया, जहां उन्हें चिकित्सकीय देख-रेख मिली। इसके साथ ही, जगह-जगह ‘बाल संदर्भ शिविर’ लगाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और एनीमिया जैसी गंभीर समस्याओं के इलाज के लिए दवाएं व परामर्श दिए गए। ​प्रशासन यह अच्छी तरह जानता था कि कुपोषण से असली लड़ाई घर की रसोई से शुरू होती है। इसीलिए परिवार की महिलाओं की सोच बदलने के लिए ‘सास-बहू सम्मेलनों’ का खाका खींचा गया। इन सम्मेलनों के जरिए माताओं और बुजुर्ग महिलाओं को बच्चों के सही खान-पान, स्वच्छता और पोषण की अहमियत समझाते हुए अभियान से सीधे जोड़ा गया।
​जुलाई 2026 तक सामने आए ये परिणाम बताते हैं कि जब जिला प्रशासन, स्वास्थ्य अमला, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और परिवार एक साथ मिलकर कदम बढ़ाते हैं, तो कुपोषण जैसी विकट चुनौती को भी मात दी जा सकती है। 88 बच्चों का सुपोषित होना केवल एक आंकड़ा भर नहीं, बल्कि जिले के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव है। ​प्रशासन का स्पष्ट ध्येय है कि कुपोषण के खिलाफ यह जंग तब तक जारी रहेगी, जब तक जिले का हर एक बच्चा पूर्णतः स्वस्थ और सुपोषित न हो जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button