रायपुर: वनांचल के किसान के लिए उसकी जमीन और उस पर उगाई फसल ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी होती है। जब दस्तावेज होने के बावजूद रिकॉर्ड ऑनलाइन न होने से फसल बेचने और शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी आए, तो यह चुनौती और बढ़ जाती है। कांसाबेल तहसील के ग्राम खारपानी निवासी किसान चंद्रेश कुमार यादव के साथ भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी। वन अधिकार पट्टा होने के बावजूद उनका एक खसरा ऑनलाइन रिकॉर्ड से छूटा हुआ था। एग्रीस्टैक में पंजीयन नहीं होने के कारण वे समर्थन मूल्य पर धान बेचने का लाभ नहीं ले पा रहे थे।
अब तस्वीर बदल चुकी है। राजस्व विभाग के सहयोग से उनके वन अधिकार पट्टे के आदेश की प्रति उपलब्ध कराई गई। छूटे हुए खसरे का एग्रीस्टैक में पंजीयन कराया गया और वन अधिकार पट्टे को ऑनलाइन आईडी से लिंक किया गया। इसके बाद श्री चंद्रेश के लिए धान मंडी में अपनी उपज बेचने का रास्ता खुल गया।
दस्तावेज था, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं होने से अटका था लाभ
ग्राम खारपानी निवासी श्री चंद्रेश कुमार यादव पिता पुस्तम राम के पास वन अधिकार पट्टा था और खेत में धान की फसल भी तैयार थी। इसके बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में खसरा दर्ज नहीं होने के कारण उनका एग्रीस्टैक पंजीयन नहीं हो पा रहा था। नतीजतन वे समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था से जुड़कर अपनी उपज बेचने से वंचित थे।
ऐसे समय में विभागीय स्तर पर उनकी समस्या का समाधान किया गया। राजस्व विभाग के सहयोग से वन अधिकार पट्टे की जानकारी उपलब्ध कराई गई और छूटे हुए खसरे को एग्रीस्टैक में दर्ज कराया गया। इसके साथ ही वन अधिकार पट्टा ऑनलाइन आईडी से लिंक होने के बाद उनकी फसल बिक्री की प्रक्रिया भी आसान हुई।
ऑनलाइन रिकॉर्ड ने खोला योजनाओं का रास्ता
वन अधिकार पट्टा ऑनलाइन होने और एग्रीस्टैक से जुड़ने के बाद श्री चंद्रेश अब अपनी धान की उपज को मंडी में बेच पा रहे हैं। इससे उन्हें समर्थन मूल्य पर धान बेचने की सुविधा मिली है और शासकीय योजनाओं से जुड़ने का रास्ता भी आसान हुआ है।
डीसीएस एवं एग्रीस्टैक जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं का उद्देश्य किसानों से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित और ऑनलाइन उपलब्ध कराते हुए उन्हें कृषि एवं अन्य शासकीय योजनाओं से जोड़ना है। चंद्रेश की कहानी बताती है कि किसी किसान के रिकॉर्ड का सही और ऑनलाइन दर्ज होना उसके लिए सरकारी सुविधा तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
चंद्रेश बोले-अब धान बेचने में नहीं होती परेशानी
अपना अनुभव साझा करते हुए चंद्रेश कुमार यादव ने कहा कि वन अधिकार पट्टा ऑनलाइन होने से अब वे धान मंडी में अपनी उपज बेच पा रहे हैं और इससे उन्हें लाभ मिल रहा है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, राज्य शासन और राजस्व विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
चंद्रेश की कहानी केवल एक किसान के दस्तावेज ऑनलाइन होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि रिकॉर्ड दुरुस्त होने और डिजिटल व्यवस्था से जुड़ने के बाद एक वनांचल किसान के लिए शासकीय योजनाओं और बाजार तक पहुंच कैसे आसान हो सकती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से किसानों और वनांचल के हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। चंद्रेश कुमार यादव की बदली हुई स्थिति इसी प्रयास के जमीनी असर की एक तस्वीर है।




