छत्तीसगढ़राज्य

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद द्वारा साइबर अपराध, सुरक्षित बचपन अभियान एवं नालसा शिक्षा योजना 2026 पर एक दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

बालोद: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन से जिले में साइबर अपराध, सुरक्षित बचपन अभियान एवं नालसा शिक्षा योजना 2026 पर एक दिवसीय कार्यशात्रा आयोजित किया गया। जिसका शुभारंभ श्याम लाल नवरत्न, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के द्वारा किया गया।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य साइबर अपराधों के प्रति जनसामान्य में जागरूकता विकसित करना, बच्चों के अधिकारों एवं संरक्षण से संबंधित विधिक प्रावधानों का प्रचार-प्रसार करना है। कार्यशाला के दौरान साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप एवं उनसे संबंधित चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, फर्जी कॉल, ओटीपी के माध्यम से होने वाली आर्थिक ठगी तथा व्यक्तिगत एवं गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ ही, साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करने, संदिग्ध लिंक से बचने, संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करने तथा साइबर अपराध की घटना होने पर तत्काल संबंधित प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत बाल अधिकारों के संरक्षण, बाल शोषण एवं उत्पीडन की रोकथाम तसाइबर अपराधों की रोकथाम, बाल संरक्षण एवं विधिक जागरूकता के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत बाल अधिकारों के संरक्षण, बाल शोषण एवं उत्पीड़न की रोकथाम तथा बच्चों के लिए सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के महत्व को रेखांकित किया गया। बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा तथा उनके समुचित विकास के लिए अभिभावकों, शैक्षणिक संस्थानों, प्रशासन एवं समाज की सक्रिय सहभागिता को आवश्यक बताया गया। कार्यशाला के माध्यम से बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने तथा बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों में समयबद्ध हस्तक्षेप एवं उचित सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
इसी क्रम में नालसा शिक्षा योजना 2026 के संबंध में जानकारी प्रदान करते हुए विधिक साक्षरता के विस्तार, पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सेवाएं उपलब्ध कराने तथा समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को उनके विधिक अधिकारों से अवगत कराने में विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को विधिक जागरूकता के माध्यम से नागरिकों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाने तथा न्याय तक उनकी सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने के महत्व से अवगत कराया गया।
उक्त कार्यशाला में कृष्ण कुमार सूर्यवंशी, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफ.टी.एस.सी. (पॉक्सो कोर्ट) बालोद, संजय कुमार सोनी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बालोद, भारती कुलदीप, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद, सतप्रीत कौर छाबड़ा, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी एवं अध्यक्ष, किशोर न्याय बोर्ड बालोद, हीरा सिन्हा, द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी बालोद, कु. कुसुमांजलि सिन्हा, प्रथम अतिरिक्त व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी बालोद, कु. अंजुम आरा, द्वितीय अतिरिक्त व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी बालोद एवं संबंधित अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे तथा पैरालीगल वालिंटियर्स भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि साइबर अपराधों की रोकथाम, बाल अधिकारों का संरक्षण एवं विधिक जागरूकता एक सुरक्षित, संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के अभिन्न अंग हैं। ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की प्रभावी भूमिका समाज के प्रत्येक वर्ग तक विधिक जानकारी पहुंचाने तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को न्यायिक एवं विधिक सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है।

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