छत्तीसगढ़राज्य

मजदूरी छोड़ ‘लखपति दीदी’ बनीं मति बाई, मुर्गी पालन से संवर रहा परिवार का भविष्य

Leaving Behind Wage Labor, Mati Bai Becomes a ‘Lakhpati Didi’; Poultry Farming Brightens Her Family’s Future

रायपुर, 24 अप्रैल 2026 छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘लखपति दीदी’ अभियान के प्रभाव से प्रदेशभर में ग्रामीण महिलाओं के जीवन में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।
इसी क्रम में सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम सोनतरई की मति बाई ने अपनी मेहनत और शासन की योजनाओं के सहयोग से आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। कभी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली मति बाई आज मुर्गी पालन व्यवसाय के माध्यम से ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
मति बाई बताती हैं कि पहले उनका परिवार आजीविका के लिए मजदूरी और छोटे-मोटे कार्यों पर निर्भर था, जिससे आय सीमित थी। ‘राधा’ स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिला। उन्होंने समूह के माध्यम से लगभग 3 लाख रुपये का ऋण लेकर मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया।
मुर्गी पालन के इस व्यवसाय से मति बाई आज प्रतिवर्ष 2 से 3 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और उन्हें समाज में ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान मिली है।
मति बाई के इस कार्य में उनके परिवार का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। उनके बच्चे भी व्यवसाय में हाथ बंटाते हैं, जिससे परिवार की आय और स्थिरता दोनों बढ़ी है। उन्होंने बताया कि अब उन्हें मजदूरी के लिए भटकना नहीं पड़ता और आय का नियमित स्रोत बनने से परिवार का भविष्य सुरक्षित हुआ है।
मति बाई ने अपनी सफलता का श्रेय शासन की योजनाओं को देते हुए कहा कि इन पहलों से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रदेश में ‘लखपति दीदी’ अभियान और आजीविका मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से हजारों महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक स्वतंत्रता की ओर अग्रसर हो रही हैं, जो ‘सशक्त महिला, सशक्त प्रदेश’ के संकल्प को साकार कर रही हैं।

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