छत्तीसगढ़राज्य

नस्ल सुधार और सरकारी योजनाओं से बदली तस्वीर, अंगेश्वर ने डेयरी से कमाए सफलता के नए आयाम

Breed improvement and government schemes have transformed the scenario; Angeshwar has achieved new heights of success through his dairy business.

​रायपुर: दृढ़ इच्छाशक्ति और शासकीय योजनाओं का सही संयोजन किसी भी साधारण प्रयास को बड़ी सफलता में बदल सकता है। धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम करगा निवासी अंगेश्वर कुर्रे ने इस बात को साबित कर दिखाया है। पशुधन में नस्ल सुधार, वैज्ञानिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन को अपनाकर उन्होंने डेयरी व्यवसाय को न केवल अपनी आजीविका का सशक्त आधार बनाया, बल्कि आत्मनिर्भरता का एक नया मानक स्थापित किया है।
अंगेश्वर कुर्रे बताते हैं कि एक समय वे पारंपरिक रूप से देशी गायों का पालन करते थे। दूध का उत्पादन बेहद कम होने के कारण परिवार की आमदनी सीमित थी और आगे बढ़ने के रास्ते कठिन नज़र आ रहे थे। इस स्थिति में पशुपालन विभाग का मार्गदर्शन उनके लिए परिवर्तन की वजह बना।
​विभाग की सलाह पर उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान के जरिए अपनी देशी गायों में नस्ल सुधार की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद, प्राप्त उन्नत नस्ल की बछियों के बेहतर पोषण के लिए उन्हें उन्नत मादा वत्स पालन योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर 6 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण पशु आहार मिला। इस शुरुआती मदद ने उनके डेयरी फार्म की नींव मजबूत कर दी।
​व्यवसाय को बड़ा रूप देने के लिए श्री कुर्रे ने वर्ष 2024-25 में राज्य डेयरी उद्यमिता योजना का लाभ उठाया। इसके तहत उन्होंने दो उन्नत नस्ल की गिर गाय खरीदीं, जिस पर उन्हें 66.6 प्रतिशत यानी 93,240 रुपये का शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहयोग ने उनके सपनों को पंख लगा दिए।
​आज उनके फार्म में जर्सी, गिर, साहिवाल, थारपारकर और रेड सिंधी जैसी उन्नत नस्लों की लगभग 25 गायें हैं। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और संतुलित आहार प्रबंधन से उनके फार्म में रोजाना 35 से 40 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।
​अंगेश्वर केवल अपने फार्म के दूध तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने आसपास के पशुपालकों से भी दूध एकत्र करना शुरू किया और उसे अभनपुर तथा राजधानी रायपुर के बाजारों में बेचना प्रारंभ किया। वर्तमान में डेयरी व्यवसाय से उन्हें प्रतिमाह 40 से 50 हजार रुपये की शुद्ध आय हो रही है।
​इसके अतिरिक्त, उन्होंने कार्य को आसान बनाने के लिए पैरा कट्टी मशीन खरीदी है, जिससे वे पैरा कट्टी बनाकर बेचने का पूरक व्यवसाय भी चलाते हैं। इस नवाचार के माध्यम से उन्होंने 2 से 3 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी प्रदान किया है।
डेयरी व्यवसाय से हुई आर्थिक प्रगति ने अंगेश्वर के जीवन का स्तर पूरी तरह बदल दिया है। कभी सीमित संसाधनों में जीवन बिताने वाले अंगेश्वर ने अब अपने परिवार के लिए एक पक्का मकान बनवा लिया है। वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ-साथ परिवार की सभी जरूरतों को सहजता से पूरा कर रहे हैं।
अंगेश्वर कुर्रे की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि ग्रामीण युवा और पशुपालक वैज्ञानिक तकनीकों, नस्ल सुधार और शासकीय योजनाओं का सही संयोजन करें, तो पशुपालन एक अत्यधिक लाभकारी उद्यम बन सकता है। उनकी यह सफलता प्रदेश के अन्य ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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