छत्तीसगढ़राज्य

हीलर हर्बल गार्डन योजना से वैद्यों को मिलेगा नया संबल

Healer Herbal Garden scheme to provide new support to traditional healers.

रायपुर: छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा और वनौषधियों के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विगत 13 अगस्त को छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा कोण्डागांव में जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। दक्षिण कोण्डागांव वनमंडल के काष्ठागार में आयोजित सम्मेलन में बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम ने हीलर हर्बल गार्डन योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर 48 वैद्यों को अपने घर की बाड़ी में औषधीय पौधों का उद्यान विकसित करने के लिए प्रथम किस्त का स्वीकृति पत्र वितरित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। वैद्य रामप्रसाद निषाद, सुखमन मरकाम, हीरालाल मरकाम, जेठूराम प्रधान, चिला पोथाम, जयनाथ मरकाम, विशाल सोरी, सकालु राम कोर्राम, मोहन नेताम और नथाराम नाग ने पारंपरिक जड़ी-बूटियों और उनके उपचार में उपयोग से संबंधित अपना अनुभव साझा किया। वैद्यों ने पहचान पत्र जारी करने तथा वनौषधियों के संरक्षण में वैद्यों की भूमिका बढ़ाने का आग्रह किया।
बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि हीलर हर्बल गार्डन योजना के तहत वैद्य अपनी बाड़ी में सामान्य रूप से उपयोग होने वाली वनौषधियों का छोटा उद्यान तैयार कर सकेंगे। इसके लिए बोर्ड की ओर से आर्थिक और तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वैद्यों के समूहों को जड़ी-बूटियों की बेहतर प्रसंस्करण के लिए निःशुल्क पिसाई मशीन (पल्वराइजर) उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि वैद्यों के निवास वाले गांवों के स्कूलों में स्कूल हर्बल गार्डन विकसित करने के लिए भी बोर्ड तकनीकी और आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है। साथ ही प्रदेश के वैद्यों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। वैद्यों द्वारा तैयार औषधीय उत्पादों और पारंपरिक उपचार से जुड़े उत्पादों के पेटेंट में भी बोर्ड सहयोग करेगा।
दक्षिण कोण्डागांव वनमंडल अधिकारी चूड़ामणि सिंह ने वैद्यों की सेवाओं के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने वनौषधियों के उपयोग की मात्रा और उपचार संबंधी जानकारी को व्यवस्थित करने, विभिन्न बीमारियों के विशेषज्ञ वैद्यों की सूची तैयार करने तथा उनके अनुभवों को साझा करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कम हो रही वनौषधियों की जानकारी वैद्यों से उपलब्ध कराने का आग्रह किया, ताकि उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक योजना बनाई जा सके। उन्होंने वैद्यों के साथ हर महीने बैठक आयोजित करने और वनौषधियों से संबंधित उपयोगी जानकारी का प्रकाशन एवं प्रचार-प्रसार करने की बात कही।
बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम ने कहा कि सरकार वैद्यों और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के संरक्षण के लिए गंभीरता से काम कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिलों में वैद्य सम्मेलन आयोजित कर वैद्यों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगले तीन महीनों में राज्य के सभी जिलों में वैद्य सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
मरकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज और वैद्यों ने पारंपरिक भोजन, दैनिक जीवनशैली, स्वास्थ्य परंपराओं और उपचार पद्धतियों के ज्ञान को आज भी जीवित रखा है। उन्होंने बताया कि नवंबर माह में अखिल भारतीय वैद्य सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें विशेषज्ञ वैद्यों को अपनी उपचार पद्धतियों का प्रदर्शन करने के लिए मंच और स्टॉल उपलब्ध कराए जाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम ने हीलर हर्बल गार्डन योजना का विधिवत शुभारंभ करते हुए 48 वैद्यों को प्रथम किस्त का स्वीकृति पत्र वितरित किया। सम्मेलन में शामिल सभी वैद्यों को सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।
सम्मेलन में दक्षिण कोण्डागांव और केशकाल वनमंडल से लगभग 200 वैद्य शामिल हुए। इस अवसर पर उपवनमंडल अधिकारी आशीष कुमार कोटरीवार, परिक्षेत्र अधिकारी मोतीलाल बेसरिया, प्रतीक वर्मा सहित दोनों वनमंडलों और बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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