छत्तीसगढ़राज्य

जहां कभी सन्नाटा था, वहां अब संवाद है: सरहदी कंदाड़ी की बदली कहानी सुशासन की पहुंच और ‘महतारी वंदन’ से महिलाओं को मिला आत्मसम्मान का संबल

Where silence once reigned, dialogue now prevails: The transformed story of the border village of Kandari—a testament to the reach of good governance and the boost to self-respect that women have received through the 'Mahtari Vandan' scheme.

रायपुर , 12 मई 2026घने जंगलों के बीच, कोटरी नदी के उस पार बसा कंदाड़ी… एक ऐसा गांव, जिसकी पहचान कभी डर, दूरी और अनिश्चितता से होती थी। यहां तक पहुंचना आसान नहीं था,न रास्ते सहज थे, न हालात। लेकिन आज वही कंदाड़ी एक नई कहानी लिख रहा है भरोसे, संवाद और बदलाव की कहानी।
उत्तर बस्तर कांकेर जिले में जब प्रशासनिक अमला नदी पार कर गांव पहुंचा, तो यह सिर्फ एक सरकारी दौरा नहीं था। यह उस दूरी को मिटाने की पहल थी, जो वर्षों से गांव और शासन के बीच बनी हुई थी। आम के पेड़ के नीचे लगी चौपाल में जब अधिकारी और ग्रामीण एक साथ जमीन पर बैठे, तो माहौल में औपचारिकता नहीं, अपनापन था। सवाल थे, जवाब थे, और सबसे अहम-एक-दूसरे को समझने की सच्ची कोशिश थी।
“सुशासन तिहार” और “बस्तर मुन्ने” जैसे प्रयासों ने इस गांव में लोकतंत्र को महसूस करने लायक बना दिया है। अब योजनाएं कागजों से निकलकर लोगों के जीवन में उतर रही हैं।
इसी चौपाल में बैठी श्रीमती सोनकाय बाई कचलामी की मुस्कान इस बदलाव की सबसे सशक्त गवाही देती है। साधारण सी दिखने वाली इस महिला की आंखों में अब आत्मविश्वास झलकता है। वह गोंडी में बताती हैं कि “महतारी वंदन योजना” उनके जीवन में एक नया सहारा बनकर आई है।
हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि अब उनके लिए केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का आधार बन चुकी है। “अब घर के लिए तेल, साग-सब्जी और जरूरी सामान खरीदने में किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता,” वह सहजता से कहती हैं।
चार बेटों और एक बेटी की जिम्मेदारियों के बीच यह छोटी सी राशि उनके लिए बड़ा सहारा है। बेटी की शादी हो चुकी है, और अब घर की छोटी-छोटी जरूरतें भी वह खुद पूरी कर पा रही हैं। यह बदलाव सिर्फ उनके जीवन में नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान में भी दिखता है।
उनकी बातों में एक सुकून है एक ऐसा सुकून, जो इस बात से आता है कि अब शासन उनके साथ खड़ा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए वह कहती हैं कि अब योजनाएं सच में गांव तक पहुंच रही हैं, उन गांवों तक भी, जहां कभी उम्मीद पहुंचना मुश्किल था।
आज कंदाड़ी में सिर्फ योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचा है, बल्कि एक नई सोच भी आई है। गांव के लोग अब खुलकर अपनी बात रखते हैं, अपनी समस्याएं साझा करते हैं और समाधान की उम्मीद भी करते हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया। यह निरंतर प्रयासों, संवेदनशील प्रशासन और जनकल्याणकारी सोच का परिणाम है।

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