छत्तीसगढ़देशराज्य

पीएम मोदी की किसान कल्याण नीति से सामाजिक सुरक्षा को मिला नया आयाम

PM Modi's farmer welfare policy has given a new dimension to social security.

नई दिल्ली। भारत के किसान देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ उनकी सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय कल्याण को मजबूत करने पर भी निरंतर जोर दिया है। इसी दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) है, जिसने सितंबर 2026 में अपने सात वर्ष पूरे किए। 12 सितंबर 2019 को शुरू की गई यह योजना पात्र छोटे और सीमांत किसानों को वृद्धावस्था में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई है।
PM-KMY के तहत 18 से 40 वर्ष की आयु वाले और अधिकतम दो हेक्टेयर तक कृषि योग्य भूमि रखने वाले पात्र किसान स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना में शामिल हो सकते हैं। 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद लाभार्थियों को न्यूनतम 3,000 रुपए मासिक पेंशन की गारंटी दी जाती है। योजना में साझा अंशदान का प्रावधान है, जिसके तहत केंद्र सरकार किसान के अंशदान के बराबर राशि का योगदान करती है।
योजना में भागीदारी के आंकड़े इसकी पहुंच को दर्शाते हैं। 6 फरवरी 2026 तक PM-KMY के तहत 24,96,252 किसान नामांकित हो चुके थे। हरियाणा में करीब 5.75 लाख, जबकि बिहार में 3.46 लाख से अधिक किसानों का नामांकन हुआ। उत्तर प्रदेश और झारखंड में भी नामांकन 2.5 लाख का आंकड़ा पार कर चुका था। योजना के क्रियान्वयन और पहुंच बढ़ाने में सरकार का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है। फरवरी 2026 तक योजना शुरू होने के बाद से देशभर में PM-KMY के लिए 540.66 करोड़ रुपए का उपयोग किया जा चुका था।
इस पहल की खासियत यह है कि यह किसान के कामकाजी वर्षों के बाद की जरूरतों को भी ध्यान में रखती है। कृषि ऐसा व्यवसाय है, जिसमें मौसम और बाजार की परिस्थितियों समेत कई कारकों के कारण अनिश्चितता बनी रहती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए वृद्धावस्था के लिए पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। PM-KMY किसानों के बाद के जीवन के लिए पेंशन सुरक्षा कवच तैयार कर इस चिंता को दूर करने का प्रयास करती है।
योजना किसान के परिवार को भी सुरक्षा प्रदान करती है। पेंशन शुरू होने के बाद सब्सक्राइबर की मृत्यु होने की स्थिति में, योजना की शर्तों के अधीन, उसके जीवनसाथी को सब्सक्राइबर की पेंशन की 50% राशि या 1,500 रुपए प्रतिमाह पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलती है। योजना में नामांकन की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत सरल रखी गई है। पात्र किसान आधार, बैंक खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर के माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर पर पंजीकरण करा सकते हैं। किसान अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार मासिक, तिमाही, चार महीने या छमाही आधार पर अंशदान कर सकते हैं।
PM-KMY प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के किसान-केंद्रित दृष्टिकोण के व्यापक आयाम को दर्शाती है। इसका दायरा केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसान परिवारों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा और सम्मान तक विस्तारित है।
पिछले वर्षों में किसानों के कल्याण के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कई सरकारी योजनाएं लागू की गई हैं। PM-KMY इसमें सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आयाम जोड़ती है और इस बात को रेखांकित करती है कि किसान कल्याण में उनके कामकाजी वर्षों के बाद की वित्तीय सुरक्षा भी शामिल होनी चाहिए। PM-KMY की सात वर्ष की यात्रा छोटे और सीमांत किसानों को औपचारिक पेंशन व्यवस्था से जोड़ने के निरंतर नीतिगत प्रयास को दर्शाती है। फरवरी 2026 तक करीब 25 लाख नामांकन के साथ इस योजना ने देशभर में अपनी पहुंच बनाई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button