छत्तीसगढ़राज्य

पहाड़ों के बीच पहुंची विकास की धारा, ढाब में हर घर तक पहुंचा स्वच्छ पानी

The Stream of Development Reaches the Mountains; Clean Water Delivered to Every Household in Dhab.

रायपुर,30 मई 2026 दुर्गम पहाड़ियों, कच्चे रास्तों और सीमित संसाधनों के बीच बसे ग्राम पंचायत खोहरा के आश्रित ग्राम ढाब में आज विकास की नई धारा बह रही है। कभी पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझने वाला यह गांव अब जल जीवन मिशन के माध्यम से आत्मनिर्भर और जागरूक ग्राम के रूप में पहचान बना रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना ने ढाब के ग्रामीणों के जीवन में ऐसा बदलाव लाया है, जिसने गांव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी हैं।
पहले इस गांव के लोगों की दिनचर्या पानी की तलाश से शुरू होती थी। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे कई किलोमीटर दूर नदी, कुएं और हैंडपंपों तक पहुंचकर पानी लाने को मजबूर थे। पहाड़ी रास्तों से भारी बर्तन उठाकर पानी लाना ग्रामीणों के लिए रोज की कठिन परीक्षा थी। गर्मी के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी, जब पानी के सीमित स्रोत सूखने लगते थे और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था।
लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव में विकसित किए गए जल स्रोत, सुदृढ़ पाइपलाइन नेटवर्क और 10 हजार लीटर क्षमता वाली पानी टंकी ने ढाब को नई पहचान दी है। मोटर पंप के माध्यम से नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था की गई है, जिससे अब गांव के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल आसानी से पहुंच रहा है। जहां पहले पानी लाने में घंटों लग जाते थे, वहीं अब घर के पास ही पानी उपलब्ध होने से लोगों का समय और श्रम दोनों बच रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस योजना ने सिर्फ पानी की समस्या का समाधान नहीं किया, बल्कि गांव के सामाजिक और स्वास्थ्य स्तर में भी बड़ा बदलाव लाया है। महिलाओं को राहत मिली है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होती और बुजुर्गों को कठिन चढ़ाई से मुक्ति मिली है। स्वच्छ पानी मिलने से जलजनित बीमारियों में भी कमी आई है।
ढाब में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की सक्रिय भूमिका इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है। समिति के सदस्य नियमित रूप से जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं और ग्रामीणों को जल संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। गांव में साफ-सफाई, जल स्रोतों की सुरक्षा और पानी के सदुपयोग को लेकर अब लोगों में नई सोच विकसित हुई है। आज ढाब केवल एक गांव नहीं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता, जल संरक्षण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जीवंत मिसाल बन चुका है। दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे इस छोटे से गांव ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति और जनभागीदारी हो, तो विकास की धारा सबसे कठिन रास्तों तक भी पहुंच सकती है।

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