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योग को वैश्विक मान्यता मानवता के लिए भारत का योगदान’, लेह में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए उपराष्ट्रपति

'Yoga's global recognition: India's contribution to humanity' – Vice President attends event held in Leh.

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को लेह में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में भाग लिया। उन्होंने नागरिकों से स्वस्थ, खुशहाल और शांतिपूर्ण समाज के लिए योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम का एक रूप नहीं है, बल्कि यह मानवता के लिए भारत की ओर से एक प्राचीन उपहार है। उन्होंने कहा कि वर्षों के ध्यान, तपस्या और आध्यात्मिक खोज के माध्यम से भारत के ऋषियों ने एक ऐसी प्रणाली विकसित की जो शरीर को पोषित करती है, मन को शांत करती है और आत्मा को उन्नत करती है।
इस दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को श्रेय देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके आह्वान पर 175 से अधिक सदस्य देशों के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था।”
इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ का उल्लेख करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में प्रगति और बढ़ती जीवन प्रत्याशा के साथ समाज की जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। ‘इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023’ का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2050 तक भारत की लगभग एक-पांचवीं आबादी बुजुर्ग होगी। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि ‘जीवन में जुड़े वर्षों का अर्थ वर्षों में जीवन का जुड़ना भी हो’ और उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सक्रिय रूप से उम्र बढ़ने को बढ़ावा देने के लिए योग को एक शक्तिशाली साधन बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जीवन के लिए सहनशक्ति, अनुशासन और अनुकूलन क्षमता की जरूरत होती है और योग इन गुणों को विकसित करने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग लंबे समय से लचीलेपन, सादगी और प्रकृति के साथ सामंजस्य का उदाहरण रहे हैं। ये ऐसे मूल्य हैं जो योग के मूल दर्शन से गहराई से जुड़ा हुआ है।
लद्दाख के लोगों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि क्षेत्र के अपने दौरे के दौरान उन्होंने यहां के लोगों को शांत, सौम्य, दयालु और प्रकृति से गहरे रूप से जुड़ा हुआ पाया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े कई गुण पहले से ही उनमें मौजूद हैं, लेकिन योग का निरंतर अभ्यास उनकी ऊर्जा व जीवन शक्ति को बनाए रखने में मदद करेगा और उन्हें अपनी पूर्ण मानवीय क्षमता तक पहुंचने में सक्षम बनाएगा।
इससे पहले, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने लेह स्थित महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर (एमआईएमसी) का दौरा किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, समाज कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख में योग व ध्यान को बढ़ावा देने की दिशा में संस्थान के बेहतरीन योगदान की सराहना की।

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