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कोच्चि में शुरू हुआ ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस’, 26 देशों के प्रतिभागी हुए शामिल

‘Operation Southern Readiness’ begins in Kochi; participants from 26 countries join in.

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने कोच्चि में बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस’ का शुभारंभ किया है। इस चार दिवसीय अभियान में 26 देशों के 254 प्रतिभागी, 74 प्रशिक्षक और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। यह बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण भारत में पहली बार आयोजित किया गया है।
भारतीय नौसेना के दक्षिणी नौसैनिक कमान मुख्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम भारत में पहली बार हो रहा है। इसका आयोजन भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाली संयुक्त कार्यबल-154 (CTF-154) के तत्वावधान में संयुक्त समुद्री बलों (Combined Maritime Forces) के सहयोग से किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में निम्नलिखित विषयों पर जोर दिया जा रहा है:
– नार्कोटिक्स (मादक पदार्थों) के खिलाफ कार्रवाई
– समुद्री सुरक्षा खतरों से निपटना
– पोत पर आग लगने की स्थिति में बचाव
– विपरीत परिस्थितियों में समुद्र में जीवित रहने के तरीके
– पोत प्रबंधन, नौवहन, खगोलीय नौवहन, संकट संचार और क्षति नियंत्रण
प्रतिभागियों को पोत संचालन, नौवहन, खगोलीय नौवहन, समुद्री संकट संचार प्रणाली, क्षति नियंत्रण और अग्निशमन जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी के साथ प्रतिभागियों को भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक सिमुलेटरों और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का उपयोग कर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के पहले दिन संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) ने लाल सागर और पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में उभरते समुद्री सुरक्षा खतरों पर विशेष सत्र आयोजित किया।
मुख्य संबोधन देने वालों में शामिल थे:
– संयुक्त कार्यबल-154 के कमांडर कमोडोर मिलिंद एम. मोकाशी
– संयुक्त समुद्री बलों के उप कमांडर कमोडोर डैन थॉमस
– दक्षिणी नौसैनिक कमान के प्रशिक्षण प्रमुख रियर एडमिरल दीपक सिंघल
वक्ताओं ने समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण, अनुभव साझा करने और बहुराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर बल दिया।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य साझेदार देशों की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करना, परिचालन समन्वय बढ़ाना और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। भारतीय नौसेना ने इसे क्षेत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया है।
आगामी तीन दिनों तक प्रतिभागी विभिन्न पेशेवर सत्रों, सिमुलेटर-आधारित प्रशिक्षण और व्यावहारिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम भारत और संयुक्त समुद्री बलों के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है।

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