
नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भारत के इंटरनेट को गैरकानूनी और अश्लील कंटेंट से मुक्त रखते हुए महिलाओं, बच्चों समेत सभी यूजर्स के लिए खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 के जरिए डिजिटल क्षेत्र में गैरकानूनी और हानिकारक कंटेंट से निपटने के लिए व्यापक नियामक ढांचा तैयार किया गया है।
डॉ. मुरुगन ने बताया कि आईटी नियमावली, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म समेत सभी मध्यस्थों की जिम्मेदारी है कि उनके कंप्यूटर संसाधनों का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बाल यौन शोषण से संबंधित, बच्चों के लिए हानिकारक, निजता का उल्लंघन करने वाला या लिंग के आधार पर अपमानजनक एवं उत्पीड़नकारी कंटेंट होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, प्रकाशित, प्रसारित या साझा न करें।
उन्होंने कहा कि आईटी नियमावली, 2021 के कानूनी दायित्वों का पालन नहीं करने पर मध्यस्थ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत थर्ड पार्टी सूचना के लिए मिली छूट खो सकते हैं। इसके अलावा वे लागू कानूनों के तहत परिणामी कार्रवाई या अभियोजन के लिए भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
राज्य मंत्री ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को सरकार ने कृत्रिम रूप से तैयार जानकारी (एसजीआई) से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए आईटी नियमों में संशोधन कर नियामक ढांचे को मजबूत किया। इसमें डीपफेक और एआई से तैयार कंटेंट भी शामिल है।
संशोधित नियमों के तहत मध्यस्थों और बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को अवैध एआई से तैयार कंटेंट के निर्माण और प्रसार को रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होंगे। इसमें अश्लील, भ्रामक, किसी व्यक्ति का प्रतिरूपण करने वाला या बच्चों के लिए हानिकारक कंटेंट शामिल है। प्लेटफॉर्मों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 जैसे कानूनों के तहत आने वाले संबंधित अपराधों की सूचना सक्षम अधिकारियों को देनी होगी।
डॉ. मुरुगन ने कहा कि इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) शुरू किया गया है। इसके जरिए आम नागरिक सभी तरह के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सकते हैं। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की कुछ श्रेणियों में गुमनाम शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि एनसीआरपी के ‘रिपोर्ट एंड चेक सस्पेक्ट’ मॉड्यूल के जरिए नागरिक संदिग्ध वेबसाइट यूआरएल, व्हाट्सऐप नंबर या टेलीग्राम हैंडल, फोन नंबर, ईमेल आईडी, एसएमएस हेडर या नंबर, डीपफेक और सोशल मीडिया यूआरएल की रिपोर्ट कर सकते हैं। इससे नागरिकों को संदिग्ध डिजिटल संस्थाओं और डीपफेक से संबंधित गतिविधियों को चिह्नित करने में मदद मिलती है।
राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार ने ‘महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम’ (सीसीपीडब्ल्यूसी) योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण के लिए 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। इसका इस्तेमाल साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने, जूनियर साइबर सलाहकारों की नियुक्ति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, लोक अभियोजकों तथा न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसी कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच और फोरेंसिक समेत विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया है।
डॉ. मुरुगन ने बताया कि गृह मंत्रालय के आई4सी ने देशभर में दो लाख से अधिक एनसीसी, एनएसएस और एनवाईकेएस के छात्रों को साइबर स्वच्छता का प्रशिक्षण दिया है। इसका उद्देश्य युवाओं को साइबर अपराधों से बचाव और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करना है।
आई 4 सी ने छात्रों को साइबर अपराध की रोकथाम के बारे में जागरूक करने के लिए ‘किशोरों/शिक्षार्थियों के लिए हैंडबुक’ जारी की है। महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘महिला सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा हैंडबुक’ भी जारी की गई है।
राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन तैयार करने और आम जनता के बीच साइबर स्वच्छता तथा साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता’ (आईएसईए) परियोजना लागू कर रही है।
डॉ. एल. मुरुगन ने यह जानकारी आज लोकसभा में श्री प्रभाकर रेड्डी वेमिरेड्डी की ओर से पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।




