छत्तीसगढ़राज्य

एक क्लिक, ओटीपी या केवाईसी की जानकारी से खाली हो सकता है खाता;आईजी रेंज गर्ग ने अधिकारियों-कर्मचारियों को किया सतर्क

A single click, OTP, or KYC detail could lead to an account being drained; IG Range Garg has alerted officers and staff.

बिलासपुर। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच बिलासपुर पुलिस ने डिजिटल लेन-देन करने वालों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। फर्जी लिंक पर क्लिक करना, ओटीपी साझा करना, केवाईसी अपडेट के नाम पर जानकारी देना या अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन भुगतान करना भारी पड़ सकता है। साइबर अपराधियों के इसी जाल से बचाने के लिए सोमवार को एसईसीएल मुख्यालय में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
केंद्रीय सतर्कता आयोग के मार्गदर्शन में एसईसीएल में चल रहे तीन माह के सतर्कता निवारक अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम छत्तीसगढ़ पुलिस के ‘साइबर जागृति अभियान’ के साथ समन्वय कर आयोजित किया गया। इसी मौके पर बिलासपुर पुलिस के ‘साइबर जागृति रक्षा सूत्र अभियान’ का भी शुभारंभ किया गया।
फिशिंग लिंक से केवाईसी फ्रॉड तक, अपराधियों के तरीके बताए
आईजी रेंज राम गोपाल गर्ग ने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप की जानकारी देते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क किया। उन्होंने फिशिंग, फर्जी लिंक, ओटीपी और केवाईसी फ्रॉड, सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराध तथा ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के तरीकों के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधा के साथ सावधानी भी जरूरी है। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, OTP या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने और संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन से बचना चाहिए। साइबर अपराधी लोगों को डराकर, लालच देकर या जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर कर ठगी करते हैं।
ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल
आईजी ने साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि ठगी होते ही बिना देर किए 1930 हेल्पलाइन पर सूचना दें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर ठगी की रकम को रोकने की संभावना बढ़ जाती है।
रक्षा सूत्र अभियान का मकसद सामूहिक जागरूकता
आईजी गर्ग ने कहा कि साइबर सुरक्षा सिर्फ किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, संस्थान और समाज के स्तर पर जागरूकता जरूरी है। ‘साइबर जागृति रक्षा सूत्र अभियान’ का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करना और साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
बिलासपुर जिले के डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम में जन-जागरूकता की बड़ी भूमिका है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन के दौरान सावधानी बरतने की अपील की। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने कहा।
एसईसीएल के तीन माह के सतर्कता निवारक अभियान के व्यापक उद्देश्यों के तहत साइबर सुरक्षा को सुशासन, पारदर्शिता और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रश्नोत्तर सत्र में अधिकारियों और कर्मचारियों ने डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया सुरक्षा, फिशिंग और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने साइबर अपराध से बचने के उपायों की जानकारी दी।
परिवार और समाज तक पहुंचाएंगे जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों और कर्मचारियों ने साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने तथा परिवार, सहकर्मियों और समाज में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में एसईसीएल के निदेशक (तकनीकी/संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास और निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) रमेश चंद्र महापात्र सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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