छत्तीसगढ़राज्य

बड़ांजी में देसी मुर्गीपालन से महिलाओं के लिए खुली स्वरोजगार की नई राह

New avenue for self-employment opens for women through free-range poultry farming in Baranji.

रायपुर: देसी मुर्गीपालन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए कम लागत में एक मजबूत और आत्मनिर्भर स्वरोजगार का जरिया बनकर उभर रहा है। राज्य के कई हिस्सों में महिला समूह (जैसे बिहान योजना या आजीविका मिशन) जुड़कर इसे बड़े पैमाने पर चला रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
बस्तर जिले के लोहण्डीगुड़ा विकासखंड के बड़ांजी क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। आजीविका सेवा केंद्र लोहण्डीगुड़ा के अंतर्गत नोडल आईएफसी लक्ष्यदीप महिला क्लस्टर संगठन, बड़ांजी में मुर्गीपालन योजना के प्रथम चरण का शुभारंभ किया गया। इसके तहत ग्राम बड़ांजी की ब्रुडिंग इकाई में 600 देसी मुर्गी के चूजों की वैज्ञानिक ब्रुडिंग शुरू की गई है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्थायी स्वरोजगार से जोड़ना और परिवार की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है। योजना से क्षेत्र की 25 चयनित महिला किसानों को सीधे लाभ मिलेगा।
ब्रुडिंग इकाई में सभी 600 चूजों को प्रारंभिक 15 दिनों तक वैज्ञानिक तरीके से रखा जाएगा। इस दौरान चूजों के लिए उचित तापमान, संतुलित दाना-पानी और आवश्यक टीकाकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। चूजों की नियमित देखरेख से उनके बेहतर विकास और मृत्यु दर को न्यूनतम रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ब्रुडिंग प्रक्रिया का तकनीकी मार्गदर्शन आईएफसी एंकर, सीनियर सीआरपी और पशु सखी द्वारा किया जा रहा है। इससे महिला किसानों को मुर्गीपालन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी भी मिलेगी और आगे पालन के दौरान चूजों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित हो सकेगी।
15 दिनों की वैज्ञानिक ब्रुडिंग पूरी होने के बाद चयनित 25 महिला किसानों को 50-50 स्वस्थ देसी चूजे वितरित किए जाएंगे। इस प्रकार प्रत्येक महिला को अपने घर पर ही मुर्गीपालन शुरू करने का अवसर मिलेगा। देसी मुर्गीपालन के माध्यम से महिलाएं कम संसाधनों में अपनी घरेलू आजीविका को मजबूत कर सकेंगी। चूजों के पालन-पोषण और उनके उत्पादों की बिक्री से प्राप्त आय परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में सहायक होगी।
आईएफसी परियोजना के माध्यम से महिलाओं को केवल आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। बड़ांजी में शुरू हुई यह पहल ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, आजीविका संवर्धन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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