छत्तीसगढ़राज्य

भारत की प्रगति के लिए अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग जरूरी: उपराष्ट्रपति

Research, innovation, and industry-academia collaboration are essential for India's progress: Vice President

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को पेरुंदुरई, इरोड में कोंगू वेल्लालर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (केवीआईटी) ट्रस्ट के संस्थापक दिवस समारोह और ‘अरिवुकुडम’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की निरंतर प्रगति के लिए अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक जगत के बीच मजबूत सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से बुनियादी शिक्षा तक सीमित न रहने और अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने युवाओं से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए खुद को तैयार करने को कहा।
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को केवल बुनियादी शिक्षा देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक केंद्रों के रूप में विकसित होना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘अरिवुकुडम’ अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान सृजन का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय विकास में योगदान देगा।
उपराष्ट्रपति ने केवीआईटी ट्रस्ट के 41 संस्थापकों की दूरदृष्टि की सराहना की। उन्होंने कहा कि केवीआईटी से जुड़े संस्थानों के माध्यम से करीब एक लाख लोगों ने शिक्षा हासिल की है। उन्होंने कोंगू क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार में संस्थानों के योगदान की प्रशंसा की और जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस तथा जापान समेत विभिन्न देशों के साथ उनके वैश्विक संबंधों का भी उल्लेख किया।
सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल को लगातार उन्नत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को बुनियादी शिक्षा से आगे बढ़कर अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा अपनानी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुसंधान, नवाचार और पेटेंट के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम करने की अपील की।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं और युवाओं के सामने नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने उनसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि ‘परिवर्तन ही एकमात्र स्थिर चीज है।’ युवाओं को अपनी क्षमताओं और खूबियों को पहचानकर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
सीपी राधाकृष्णन ने मानसिक शांति और बुद्धि को तेज करने में योग तथा ध्यान की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के कथन, “आप जैसा सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं”, का उल्लेख करते हुए युवाओं से सकारात्मक सोच और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की प्रगति के लिए उद्योग और अकादमिक जगत के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है। उन्होंने कोंगू इंजीनियरिंग कॉलेज के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का दौरा किया, जहां नवोन्मेषी परियोजनाओं और तकनीकी समाधानों को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में एंकर इंडस्ट्रीज और ‘अरिवुकुडम’ अनुसंधान पार्क के बीच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। इससे उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच सहयोग को और मजबूत करने तथा अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
उपराष्ट्रपति ने कॉलेज और ट्रस्ट से जुड़े विशिष्ट लोगों को सम्मानित किया। उन्होंने ‘अरिवुकुडम’ अनुसंधान पार्क, फार्मेसी कॉलेज, कोंगू नेचुरोपैथी और योग मेडिकल कॉलेज तथा केवीआईटीटी के क्लाउड किचन की आधारशिला रखने के उपलक्ष्य में पट्टिकाओं का अनावरण भी किया।

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