आईएमडी ने शुरू की एआई-सक्षम मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, अब 10 दिन पहले मिलेगी स्थानीय मौसम की जानकारी : डॉ. जितेंद्र सिंह
IMD Launches AI-Enabled Weather Forecasting System; Local Weather Information Now Available 10 Days in Advance: Dr. Jitendra Singh

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अत्यंत-स्थानीय मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराने के लिए एआई-सक्षम प्रणालियां शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि नई उन्नत पूर्वानुमान प्रणालियां 10 दिन पहले तक स्थानीय मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएंगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने 16 राज्यों और 3,000 से अधिक उप-जिलों के लिए एआई-सक्षम मानसून पूर्वानुमान प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के लिए एआई-आधारित मानसून अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली और 1 किलोमीटर रिजॉल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान प्रणाली भी लॉन्च की।
मौसम सेवाओं के आधुनिकीकरण पर सरकार का जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने जलवायु सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए कई परिवर्तनकारी पहलें शुरू की हैं। उन्होंने बताया कि ‘मिशन मौसम’, रडार नेटवर्क का विस्तार, प्रेक्षण प्रणालियों को मजबूत करना, डेटा संचार अवसंरचना का आधुनिकीकरण और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधाओं का विस्तार मिलकर एक मजबूत और प्रौद्योगिकी-संचालित मौसम पूर्वानुमान तंत्र तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आईएमडी अब भारत के दैनिक प्रशासन और सार्वजनिक निर्णय-निर्माण का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
मोबाइल एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पहुंचेंगी चेतावनियां
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मौसम संबंधी परामर्श और प्रारंभिक चेतावनी अब मोबाइल एप्लिकेशन, एसएमएस अलर्ट, व्हाट्सएप, किसान पोर्टल, टेलीविजन और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि अंतिम छोर तक सूचना पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि चरम मौसम की घटनाओं के दौरान नुकसान कम करने के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित हितधारकों द्वारा मौसम संबंधी सलाह का समय पर पालन करना भी बेहद जरूरी है।
नागरिक-केंद्रित मौसम सेवा तंत्र की दिशा में बड़ा कदम
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नई पूर्वानुमान प्रणालियां जलवायु-सहिष्णु, डिजिटल रूप से सशक्त और नागरिक-केंद्रित मौसम सेवा तंत्र विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति सीधे सामाजिक और आर्थिक लाभों में योगदान दे रही है।
एआई और मौसम मॉडल के संयोजन से तैयार हुई प्रणाली
डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहा कि नई प्रणालियां हितधारक-आधारित पूर्वानुमान मॉडल हैं, जिन्हें संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल और एआई-आधारित डेटा-संचालित तकनीकों के संयोजन से विकसित किया गया है।
उन्होंने कहा कि कृषि और अन्य क्षेत्रों से अत्यंत-स्थानीय और उच्च-रिजॉल्यूशन मौसम पूर्वानुमानों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए इन प्रणालियों को तैयार किया गया है।
जिला स्तर तक मिलेगा मानसून का सूक्ष्म पूर्वानुमान
डॉ. रविचंद्रन ने बताया कि मानसून अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली अब जिला स्तर तक मानसून की प्रगति का सूक्ष्म पूर्वानुमान उपलब्ध कराएगी। वहीं, उत्तर प्रदेश पायलट परियोजना सघन प्रेक्षण नेटवर्क और एआई तकनीकों की मदद से 1 किलोमीटर रिजॉल्यूशन पर वर्षा पूर्वानुमान देने की क्षमता प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे प्रेक्षण अवसंरचना का विस्तार होगा, वैसे-वैसे इन सेवाओं को देश के अन्य हिस्सों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।



