
रायपुर। प्रदेश में अप्रैल और मई में रेकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण तापमान में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी का सीधा और जानलेवा असर अब प्रदेश के प्रमुख जलाशयों पर दिखने लगा है। तेज तपिश और चिलचिलाती धूप के कारण बांधों का जलस्तर बेहद तेजी से नीचे गिर रहा है, जिससे कई जलाशय सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज एक महीने पहले तक धमतरी स्थित गंगरेल बांध में जहां 64 फीसदी पानी मौजूद था, वह अब घटकर केवल 49 फीसदी रह गया है। गंगरेल के अलावा सिकासार, तांदुला, केलो और गोंदली जैसे बड़े बांधों में भी पानी का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरा है। राहत की बात बस इतनी है कि शेष अन्य बांधों में अभी पानी की स्थिति नियंत्रण में है।
इस साल तापमान सामान्य से काफी अधिक (44-45 डिग्री सेल्सियस) रहने के कारण जलाशयों में वाष्पीकरण की दर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। असल में, पानी जिन सूक्ष्म अणुओं से मिलकर बनता है, अत्यधिक गर्मी और तापमान बढ़ने पर वे भीतर ही भीतर तेजी से गति करने लगते हैं। रायपुर और आसपास के मैदानी इलाकों में पड़ी भीषण गर्मी से इन अणुओं को इतनी ऊर्जा मिल गई कि वे पानी की सतह को तोड़कर हवा में विलीन हो रहे हैं मौसम विज्ञानियों के अनुसार, जब तापमान बढ़ता है और हवा रूखी होती है, तो वह एक ‘स्पंज’ की तरह काम करती है। यह शुष्क हवा जैसे ही तालाब या बांध के ऊपर से गुजरती है, भाप को सोख लेती है। यदि हवा की गति केवल 10 किमी प्रति घंटा भी हो, तो किसी बड़े जलाशय से रोजाना 12 से 15 हजार लीटर पानी हवा में गायब हो जाता है। यानी महीने भर में एक पूरा स्वीमिंग पूल जितना पानी बिना किसी इस्तेमाल के उड़ रहा है। जो तालाब चौड़े और उथले हैं, वहां धूप सीधे नीचे तक पहुंचने से वे सबसे पहले सूख रहे हैं।


