छत्तीसगढ़राज्य

प्रशासनिक डेटा के मानकीकरण से सशक्त होगा सुशासन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण

Standardization of administrative data will strengthen good governance and evidence-based policy formulation.

रायपुर: योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज महानदी भवन, नवा रायपुर में “Data Harmonization and Use of Administrative Data for Governance” विषय पर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शासन के विभिन्न विभागों में उपलब्ध प्रशासनिक डेटा का मानकीकरण, गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर सुशासन तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सुदृढ़ करना था।
कार्यशाला में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं नामित नोडल अधिकारियों को नेशनल मेटाडेटा स्टैंडर्ड (NMDS 2.0), स्टैटिस्टिकल क्वालिटी एश्योरेंस फ्रेमवर्क (SQAF), विभागीय डेटा कैटलॉग, मेटाडाटा निर्माण, यूनिक आइडेंटिफायर्स, डेटा गुणवत्ता मूल्यांकन तथा विभागों के मध्य डेटा एकीकरण एवं अंतर-संचालनीयता (Interoperability) से संबंधित विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान विभागीय डेटासेट के मानकीकरण, डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
इस अवसर पर योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के सचिव भुवनेश यादव ने सभी विभागों के नामित नोडल अधिकारियों को संबोधित करते हुए डेटा हार्मोनाइजेशन की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं मानकीकृत प्रशासनिक डेटा सुशासन, पारदर्शिता, त्वरित निर्णय प्रक्रिया तथा प्रभावी सेवा वितरण का आधार है। उन्होंने नेशनल मेटाडेटा स्टैंडर्ड (NMDS 2.0), स्टैटिस्टिकल क्वालिटी एश्योरेंस फ्रेमवर्क (SQAF) तथा प्रशासनिक डेटा के मानकीकरण एवं गुणवत्ता संवर्धन से संबंधित विषयों पर विस्तार से जानकारी देते हुए सभी विभागों से इस दिशा में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय के संचालक तीर्थराज अग्रवाल ने विभागों द्वारा आगामी चरणों में किए जाने वाले कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी का नामांकन, विभागीय डेटासेट की पहचान एवं सूचीकरण, भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के निर्धारित प्रारूप में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने तथा अन्य अपेक्षित सूचनाएं शीघ्र उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय इस पूरी प्रक्रिया में विभागों को आवश्यक तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराएगा।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि डेटा हार्मोनाइजेशन राज्य शासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है तथा राष्ट्रीय स्तर पर भी यह सुशासन एवं डिजिटल प्रशासन को सुदृढ़ बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। प्रशासनिक डेटा का मानकीकरण विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, त्वरित एवं सटीक निर्णय लेने, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने तथा प्रमाण-आधारित नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यशाला में विभागों से अपेक्षा की गई कि वे प्रशिक्षण में उपलब्ध कराए गए प्रारूपों के अनुसार विभागीय डेटासेट की पहचान, फीडबैक प्रपत्र, मेटाडाटा तैयार करने तथा SQAF के अंतर्गत स्व-मूल्यांकन की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करें और निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक जानकारी आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय को उपलब्ध कराएं, ताकि राज्य स्तर पर एकीकृत एवं मानकीकृत डेटा प्रणाली विकसित की जा सके।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने प्रशासनिक डेटा के एकीकृत उपयोग, मानकीकरण, गुणवत्ता सुधार तथा डेटा साझाकरण से जुड़े विषयों पर सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने तकनीकी सुझाव एवं अनुभव साझा किए। विभाग ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से राज्य में एक सुदृढ़, मानकीकृत एवं गुणवत्ता-आधारित डेटा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा, जिससे योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, प्रभावी निगरानी, मूल्यांकन तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को नई गति मिलेगी।

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