छत्तीसगढ़राज्य

अबूझमाड़ तक पहुंची विकास की राह, सड़क ने बदल दी कटेर के ग्रामीणों की जिंदगी

The path of development reaches Abujhmad; a road transforms the lives of Kater's villagers.

रायपुर: कभी घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे अबूझमाड़ के कटेर गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। बारिश के दिनों में संकरी पगडंडियां भी कीचड़ में बदल जाती थीं। बीमारों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में घंटों लग जाते थे। आज वही गांव पक्की सड़क से जुड़ चुका है और इसके साथ ही ग्रामीणों की जिंदगी भी बदलने लगी है।
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर तक 8.75 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग 8.56 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह सड़क केवल दो स्थानों को नहीं जोड़ती, बल्कि अबूझमाड़ के दूरस्थ जनजातीय अंचल को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बन गई है।
सड़क बनने के बाद अब एम्बुलेंस, शासकीय वाहन और अन्य जरूरी सेवाएं सीधे गांव तक पहुंच रही हैं। इससे स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलने लगा है। स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति भी बढ़ी है।
इस बदलाव का सबसे अधिक लाभ किसानों और वनोपज संग्राहकों को मिला है। अब वे अपनी उपज आसानी से बाजार तक पहुंचा रहे हैं, जिससे बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ी है। प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य निर्माण कार्यों के लिए सामग्री पहुंचाना भी पहले की तुलना में आसान हो गया है। बिजली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिली है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले गांव तक पहुंचने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता था, लेकिन अब वाहन सीधे गांव तक आते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के इलाज और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना काफी आसान हो गया है।
अबूझमाड़ में बनी यह सड़क बताती है कि मजबूत संपर्क मार्ग केवल आवागमन का साधन नहीं होते, बल्कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेहतर जीवन की नई संभावनाओं का रास्ता भी खोलते हैं। यही बदलाव अब कटेर और आसपास के गांवों में साफ दिखाई देने लगा है।

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