छत्तीसगढ़राज्य

एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवीन विधानसभा परिसर में लगाया पौधा

Minister Rajesh Agrawal planted a sapling at the new Legislative Assembly complex under the "Ek Ped Maa Ke Naam" (A Tree in Mother's Name) campaign.

रायपुर। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत आज नवा रायपुर अटल नगर स्थित नवीन छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के निर्माण की जिम्मेदारी भी है।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान प्रत्येक नागरिक को अपनी माँ के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जागृत करने का प्रेरक अभियान है। उन्होंने कहा कि पौधा लगाना केवल एक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माँ के नाम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का दायित्व निभाए, तो यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप लेकर प्रदेश को और अधिक हराभरा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नवा रायपुर को “पीपल फॉर पीपल सिटी” के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से एक लाख पीपल के पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी अभियान चलाया जा रहा है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता के संवर्धन, स्वच्छ वायु, जलवायु संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, छाया, वर्षा, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन प्रदान करते हैं। इसलिए पौधे लगाने के साथ-साथ उनका संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने का संकल्प ले। यही हमारी मातृभूमि, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति सच्ची सेवा होगी।
उन्होंने कहा, ” हम सभी ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़कर अधिक से अधिक पौधे लगाएं, उनका संरक्षण करें और हरित, स्वच्छ तथा समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।”

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