छत्तीसगढ़राज्य

तोंगपाल क्षेत्र के 50 ग्रामीण परिवारों को मिला स्वरोजगार का सहारा

50 rural families in the Tongpal area have gained a means of self-employment.

रायपुर: ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने और कुक्कुट पालन को प्रोत्साहित करने के लिए बैकयार्ड कुक्कुट इकाई वितरण योजना चलाई जा रही है।इस योजना के तहत किसानों और महिलाओं को नाममात्र अंशदान पर 28 दिवसीय चूज़े और कुक्कुट आहार (दाना) सीधे घर तक उपलब्ध कराए जाते हैं। छोटे, सीमांत किसानों और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को अतिरिक्त आय का साधन प्रदान करना है।
सुकमा जिले के तोंगपाल क्षेत्र के ग्रामीण परिवारों के लिए कुक्कुट पालन अब आय का नया साधन बनने जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और पशुपालन के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग द्वारा ग्रामीणों को निःशुल्क कुक्कुट इकाइयां उपलब्ध कराई गई हैं।
सुकमा जिले के कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन और पशुधन विकास विभाग के उपसंचालक डॉ. संदीप इंदुरकर के मार्गदर्शन में छिंदगढ़ विकासखंड के तोंगपाल क्षेत्र के ग्राम लेदा, कंकापाल, तोंगपाल, मारेंगा और टीपनपाल में 50 कुक्कुट इकाइयों का वितरण किया गया। योजना के तहत प्रत्येक चयनित हितग्राही को 45 उन्नत नस्ल के चूजे और उनके पालन-पोषण के लिए 10 किलोग्राम पौष्टिक दाना निःशुल्क दिया गया।
सरकारी सहायता से ग्रामीणों को कुक्कुट पालन शुरू करने के लिए प्रारंभिक सहयोग मिला है। चूजे और दाना निःशुल्क मिलने से हितग्राहियों पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम हुआ है। अब वे कुक्कुट पालन को अपनी अन्य आजीविका गतिविधियों के साथ जोड़कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
कुक्कुट पालन ग्रामीण परिवारों के लिए कम लागत में शुरू किया जा सकने वाला व्यवसाय है। इससे अंडे और मुर्गियों की बिक्री के माध्यम से परिवार की आय बढ़ाने के अवसर मिलते हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के स्थायी अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस अवसर पर ग्राम लेदा में आयोजित वितरण कार्यक्रम में जनपद सदस्य और सरपंच सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। उन्होंने ग्रामीणों के हित में किए गए इस प्रयास की सराहना की।
सरकारी योजना से मिले इस सहयोग से तोंगपाल क्षेत्र के ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। यह पहल ग्रामीण परिवारों को सहायता से स्वरोजगार और स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन रही है।

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