छत्तीसगढ़राज्य

इंडसइंड बैंक में बड़ा घोटाला? जांच के दौरान अधिकारियों पर लगा सबूत मिटाने और CCTV फुटेज छुपाने का गंभीर आरोप

Major scam at IndusInd Bank? Officials face serious allegations of destroying evidence and concealing CCTV footage during the investigation.

महासमुंद। इंडसइंड बैंक के भीतर एक बड़े आंतरिक घोटाले और उसे दबाने के लिए उच्च अधिकारियों द्वारा सबूतों को नष्ट करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने बैंक के प्रबंध निदेशक और भारतीय रिजर्व बैंक को ईमेल भेजकर मामले की निष्पक्ष केंद्रीय जांच कराने की मांग की है।यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र का बताया जा रहा है।
आरोप है कि जांच अधिकारी राजीव उपाध्याय ने कैशियर गुण सागर के कंप्यूटर में एक संदिग्ध ईमेल देखा। जब उन्हें पता चला कि यह ईमेल विद्या शंकर साहू के सिस्टम से आया है, तो वे तुरंत कैबिन से बाहर आए और विद्या शंकर साहू के कंप्यूटर से उस महत्वपूर्ण ईमेल को डिलीट कर दिया। जब गवाहों ने उस ईमेल का प्रिंट आउट मांगा, तो अधिकारी ने यह कहकर मना कर दिया कि ईमेल में कुछ नहीं था और वह रिकवर नहीं हो सकता।
स्टेट हेड ने CCTV फुटेज दिखाने से किया मना
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब घटना के समय का CCTV फुटेज दिखाने की मांग की गई, तो बैंक के स्टेट हेड सचिन चौरसिया ने यह बहाना बनाकर मना कर दिया कि उनके पास केवल ३० दिनों का ही बैकअप रहता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्टेट हेड ने सच को सामने आने से रोकने के लिए फुटेज की जांच करने का कोई प्रयास ही नहीं किया।
स्थानीय अधिकारियों पर अविश्वास, ट्रांसफर और फॉरेंसिक जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने बैंक के शीर्ष प्रबंधन से निम्नलिखित तात्कालिक मांगें की हैं:CCTV फुटेज फ्रीज हो: स्थानीय स्तर पर सबूत नष्ट होने से बचाने के लिए मुख्य सर्वर से घटना के दिनों का CCTV बैकअप तुरंत सुरक्षित (Lock) किया जाए।
मैनेजर का ट्रांसफर हो:
वर्तमान ब्रांच मैनेजर सुजीत शानीकर को तत्काल प्रभाव से किसी दूसरी शाखा में स्थानांतरित किया जाए, ताकि वे बचे हुए सबूतों को प्रभावित न कर सकें।फॉरेंसिक ऑडिट हो: हेड ऑफिस के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा मैनेजर सुजीत शानीकर, विद्या शंकर साहू और गुण सागर के कंप्यूटरों की गहराई से फॉरेंसिक जांच कराई जाए ताकि डिलीट किए गए ईमेल रिकवर हो सकें।

बाहरी टीम से जांच: छत्तीसगढ़ के स्थानीय अधिकारियों पर अविश्वास जताते हुए मामले की जांच राज्य से बाहर की केंद्रीय सतर्कता टीम से कराने की मांग की गई है।इस मामले में तीनों प्रत्यक्षदर्शी गवाह—लोकनाथ पटेल, लोचन चौधरी और अंजोर यादव—केंद्रीय जांच टीम के सामने अपने आधिकारिक बयान दर्ज कराने के लिए तैयार हैं। अब देखना यह है कि इंडसइंड बैंक का शीर्ष प्रबंधन और आरबीआई इस गंभीर शिकायत पर क्या एक्शन लेते हैं।

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