नई दिल्ली। ईटानगर में दिव्यांग बच्चों के लिए बने डोनी-पोलो मिशन स्कूल का दौरा करने पहुंचे उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने छात्रों से कहा कि वे कभी भी किसी को अपने सपनों की सीमा तय न करने दें। उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने, खुद पर भरोसा रखने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। छात्रों द्वारा प्रस्तुत ‘वंदे मातरम’ के गायन को सुनकर उपराष्ट्रपति भावुक हो गए और कहा कि उन्हें बच्चों के दिल से निकलती देशभक्ति की भावना महसूस हुई।
उपराष्ट्रपति ने ईटानगर के चिम्पू स्थित डोनी-पोलो मिशन स्कूल का दौरा किया और सुनने, देखने तथा बौद्धिक रूप से अक्षम बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने संस्थान के विभिन्न गतिविधि क्षेत्रों का जायजा लिया और छात्रों को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्थान का दौरा उन्हें गहरी भावुकता और देशभक्ति की भावना से भर गया। खास तौर पर छात्रों को ‘वंदे मातरम’ गाते हुए सुनना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि बच्चों ने यह गीत इतनी ईमानदारी से गाया कि उन्हें उनके दिल से निकलती देशभक्ति की भावना महसूस हुई।
सी. पी. राधाकृष्णन ने अरुणाचल प्रदेश सरकार, डोनी-पोलो मिशन, स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों, पुनर्वास विशेषज्ञों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में राज्य सरकार की उपलब्धियां समाज के हर पहलू को कवर करती हैं।
छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर व्यक्ति अनोखा होता है और हर व्यक्ति में प्रतिभा होती है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे कभी भी किसी को अपने सपनों की सीमा तय न करने दें। उन्होंने छात्रों को खुद पर विश्वास रखने और लगातार मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उपराष्ट्रपति ने प्रेरणादायक यात्रा का उदाहरण देते हुए छात्रों से उन लोगों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया, जिन्होंने अपनी चुनौतियों पर विजय हासिल की है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की क्षमता और सपनों की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं।
सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि डोनी-पोलो मिशन स्कूल जैसे संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं। ये बच्चों को आशा, गरिमा, अवसर, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान समावेशी ‘विकसित भारत@2047’ के निर्माण में सार्थक योगदान देते हैं।
उपराष्ट्रपति ने प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल उपकरण और सहायक प्रौद्योगिकियां बाधाओं को दूर करने के साथ शिक्षा को अधिक सुलभ और व्यक्तिगत बनाने में मदद कर सकती हैं।
उन्होंने छात्रों के लिए एआई-संचालित शिक्षण सामग्री और समग्र सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में डोनी-पोलो मिशन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए सीखने के अवसरों को और बेहतर बना सकता है।
उपराष्ट्रपति ने विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए शिक्षकों तथा कर्मचारियों के असाधारण धैर्य, करुणा और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने बच्चों को सहयोग और प्रोत्साहन देने में माता-पिता की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया।
अपने संबोधन के अंत में सी. पी. राधाकृष्णन ने छात्रों से कहा, “आज, आपने मुझे बहुत सी बातें सिखाई हैं।” उन्होंने छात्रों के दृढ़ संकल्प और उनसे मिली प्रेरणा की सराहना की।
कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कैवल्य त्रिविक्रम परनायक, मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उपमुख्यमंत्री चौना मेन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा जनजातीय मामलों के मंत्री कोंटो जिनी, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, डोनी-पोलो मिशन और उसके प्रबंधन के प्रतिनिधि, शिक्षक, पुनर्वास विशेषज्ञ, कर्मचारी तथा संस्थान के छात्र मौजूद रहे।
इससे पहले उपराष्ट्रपति ने ईटानगर स्थित जे. एन. राज्य संग्रहालय का भी दौरा किया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर की समृद्ध मानव जाति विज्ञान संबंधी विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करने में संग्रहालय की भूमिका की सराहना की।




