
अम्बिकापुर 04 जून 2026 आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत उर्वरकों का उपयोग कर जिले के किसान अब अपनी खेती को लाभ का सौदा बना रहे हैं। कृषि में नवाचार अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण दरिमा (मोतीपुर) के निवासी उन्नतशील किसान श्री सत्यम कुमार पेश कर रहे हैं। श्री सत्यम अपनी 6 हेक्टेयर कृषि भूमि पर पिछले तीन वर्षों से ’नैनो यूरिया-डीएपी’ का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
अपने अनुभवों को साझा करते हुए सत्यम कुमार बताते हैं कि नैनो यूरिया के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे खेत की मिट्टी (जमीन) को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है। पारंपरिक खादों की तरह यह जमीन में व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि इसका सीधा असर और पोषण फसलों को मिलता है। इससे फसल की वृद्धि और गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार देखने को मिल रहा है।
पारंपरिक यूरिया की बोरियों के रखरखाव और परिवहन में आने वाली दिक्कतों से अब सत्यम को पूरी तरह निजात मिल गई है। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया का लाना-ले जाना (परिवहन) बहुत ही आसान और सस्ता है। यह आर्थिक रूप से भी बेहद किफायती है। इसकी एक बोतल की कीमत मात्र 225 रुपये है, जो कि एक बोरी यूरिया के बराबर काम करती है और एक एकड़ खेत के लिए पर्याप्त होती है।
सत्यम नैनो यूरिया का उपयोग केवल एक फसल तक सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि वे इसका इस्तेमाल धान, गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के साथ-साथ अपनी बाड़ी में उगाई जाने वाली साग-सब्जियों और फल-फूलों में भी कर रहे हैं। छिड़काव (स्प्रे) विधि से इसका उपयोग करना बेहद आसान है। उनका कहना है कि बस स्प्रे मशीन से छिड़काव करें और फसल को पूरा पोषण दें। उनका खेती का मूल मंत्र बन चुका है ष्कम लागत, मुनाफा ज्यादाष्।
खेती में मिल रहे उत्कृष्ट परिणामों से उत्साहित सत्यम कुमार ने जिले के अन्य किसान भाइयों से भी अपील की है कि वे अपनी खेती की लागत कम करने, फसल का उत्पादन बढ़ाने और अपनी जमीन की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए पारंपरिक उर्वरकों के स्थान पर आधुनिक ’नैनो यूरिया’ और ’नैनो डीएपी’ का ही अधिकाधिक उपयोग करें।



