छत्तीसगढ़राज्य

सामुदायिक डबरी बनी जल संरक्षण और रोजगार का सफल मॉडल

Community pond emerges as a successful model for water conservation and employment.

रायपुर. 24 जुलाई 2026 सामुदायिक डबरी निर्माण से बदली कर्रा की तस्वीरबिलासपुर के कोटा विकासखंड के ग्राम पंचायत नवागांव कर्रा के मजौलीपारा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सामुदायिक डबरी का निर्माण किया गया है। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण, भू-जल स्तर में वृद्धि, सिंचाई सुविधा का विस्तार, मत्स्य पालन को बढ़ावा देना तथा ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना था। इस कार्य के लिए कुल 5.11 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। गांव के समीप स्थित मुक्तिधाम क्षेत्र में वर्षा जल के उचित संग्रहण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
बरसात का अधिकांश पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था, जिससे गर्मी के मौसम में जल संकट, भू-जल स्तर में गिरावट तथा सिंचाई की समस्या बनी रहती थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए सामुदायिक डबरी का निर्माण कराया गया, जिससे वर्षा जल का प्रभावी संचयन संभव हुआ। डबरी निर्माण के बाद आसपास के क्षेत्रों में भू-जल पुनर्भरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। खेतों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने लगा, जिससे कृषि गतिविधियों को नई गति मिली। साथ ही जल उपलब्धता बढ़ने से स्थानीय स्तर पर मत्स्य पालन की शुरुआत हुई, जिसने ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार का नया स्रोत तैयार किया।
इस कार्य ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। डबरी में संचित पानी के कारण आसपास के पेड़-पौधों एवं हरियाली के संरक्षण में सहायता मिली। वर्षा के पानी के अनियंत्रित बहाव में कमी आने से मिट्टी कटाव पर भी नियंत्रण हुआ तथा क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन मजबूत हुआ। इससे ग्रामीणों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी। डबरी का निर्माण मुक्तिधाम के समीप होने के कारण सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। पहले यहां अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक गतिविधियों के दौरान जल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जबकि अब इस डबरी से आवश्यक जल उपलब्ध होने लगा है। इसके साथ ही यह सामुदायिक परिसंपत्ति गांव के अन्य सामाजिक कार्यों में भी उपयोगी साबित हो रही है।
आज यह सामुदायिक डबरी ग्राम नवागांव कर्रा के लिए जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बन चुकी है। इस पहल से जहां एक ओर कृषि उत्पादन, मत्स्य पालन और भू-जल संरक्षण को मजबूती मिली है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध हुआ है। यह कार्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।

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