छत्तीसगढ़राज्य

नवा तरिया और आजीविका डबरी से मजबूत होगा जल संरक्षण का आधार

The foundation of water conservation will be strengthened through 'Nawa Tariya' and 'Aajeevika Dabri'.

एमसीबी/04 जून 2026 जिले में जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत के समन्वय में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत जिलेभर में 40 से अधिक नवीन तालाब (नवा तरिया) तथा लगभग 300 आजीविका डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत कराए गए हैं, जिन्हें जून 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इन जल संरचनाओं के निर्माण से वर्षा जल का व्यापक स्तर पर संग्रहण संभव होगा, जिससे भविष्य में जल संकट की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद मिलेगी। जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा और सतत विकास की मजबूत नींव तैयार करना है।
नवा तरिया एवं डबरी निर्माण से वर्षा का पानी गांवों में ही संरक्षित होगा, जिससे भू-जल स्तर में सुधार आएगा और सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल स्रोत उपलब्ध होंगे। इसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा तथा फसल उत्पादन बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी। विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए आजीविका डबरी महत्वपूर्ण साबित होगी। किसान अपने खेतों में वर्षा जल का संग्रहण कर आवश्यकता पड़ने पर सिंचाई कर सकेंगे, जिससे खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सकेगी।
मनरेगा के “मोर गांव-मोर पानी” अभियान के अंतर्गत संचालित इन कार्यों से बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है। प्रतिदिन हजारों श्रमिक निर्माण कार्यों में जुटे हुए हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हो रही है और पलायन की आवश्यकता भी कम हो रही है। जिला प्रशासन रोजगार मूलक कार्यों को जल संरक्षण से जोड़कर ऐसी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण कर रहा है, जिनका लाभ आने वाले वर्षों तक ग्रामीणों को मिलता रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार तालाब, डबरी एवं अन्य जल संरक्षण संरचनाएं जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और बढ़ते जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने में अत्यंत प्रभावी होती हैं। इनसे भू-जल पुनर्भरण बढ़ता है, पर्यावरण संरक्षण को बल मिलता है और हरित विकास को प्रोत्साहन मिलता है।
जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायतों एवं ग्रामीणों से अपील की है कि वे जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दें तथा निर्मित जल संरचनाओं के संरक्षण और रखरखाव में सक्रिय भागीदारी निभाएं। प्रशासन का विश्वास है कि सामूहिक प्रयासों से जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जल संरक्षण एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नई मिसाल स्थापित करेगा।

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