
एमसीबी/04 जून 2026 जल संरक्षण, रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास को एक साथ जोड़ते हुए मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत “मोर गांव-मोर पानी” अभियान प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत जिले में प्रतिदिन औसतन 20 हजार श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ भविष्य के जल संकट से निपटने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।
कलेक्टर संतन देवी जांगड़े के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े बड़े पैमाने पर रोजगारमूलक कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों पर लगभग 12 करोड़ 83 लाख रुपये की राशि व्यय की जा रही है। स्वीकृत कार्यों में नवीन तालाब निर्माण एवं गहरीकरण, आजीविका डबरी (खेत तालाब), परकोलेशन टैंक, अर्दन चेक डैम, जल संग्रहण संरचनाएं तथा भू-जल पुनर्भरण आधारित विभिन्न कार्य शामिल हैं। इन संरचनाओं के निर्माण से वर्षा जल का संरक्षण होगा, भू-जल स्तर में सुधार आएगा तथा किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल स्रोत उपलब्ध होंगे। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी।
मनरेगा के तहत संचालित कार्यों से हजारों ग्रामीण श्रमिकों को अपने गांवों में ही रोजगार मिल रहा है। इससे मजदूरों को पलायन किए बिना स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो रहा है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। साथ ही ऐसे स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हो रहा है, जिसका लाभ आने वाले वर्षों तक ग्रामीण समुदाय को मिलता रहेगा।
जिला प्रशासन का मानना है कि जल संरक्षण आधारित ये कार्य केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा नहीं करेंगे, बल्कि भविष्य में संभावित जल संकट से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इनसे पेयजल उपलब्धता बढ़ेगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास की नई संभावनाएं विकसित होंगी। जिला प्रशासन ने सभी जनपद पंचायतों एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ग्रामीणों से मनरेगा कार्यों में सक्रिय सहभागिता करने और जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की गई है।
“मोर गांव-मोर पानी” अभियान आज केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास की मजबूत नींव बनता जा रहा है।



