छत्तीसगढ़राज्य

जेलों में बंदियों के पुनर्वास की दिशा में प्रभावी पहल, कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की नई राह

Effective initiatives for the rehabilitation of prison inmates; a new path to self-reliance through skill training.

रायपुर;छत्तीसगढ़ में बंदियों के पुनर्वास एवं उन्हें सम्मानजनक जीवन की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में कौशल विकास आधारित पहलें लगातार सशक्त हो रही हैं। इसी क्रम में सूरजपुर जिला जेल में सेंट्रल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) द्वारा 13 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया, जिसमें 35 बंदियों ने अगरबत्ती, साबुन एवं हैंडवॉश निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
2 जुलाई से 13 जुलाई तक संचालित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों में उद्यमिता की भावना विकसित करना तथा रिहाई के बाद उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उत्पाद निर्माण की तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, विपणन, वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग प्रक्रियाओं तथा विभिन्न शासकीय स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
प्रशिक्षण के अंतिम दिवस सभी 35 प्रतिभागियों का लिखित एवं प्रायोगिक मूल्यांकन किया गया तथा सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
जिला जेल अधीक्षक ने कहा कि इस प्रकार के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भर बनने की भावना विकसित करते हैं। वहीं आरसेटी के निदेशक ने बताया कि संस्थान केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रिहाई के बाद बैंक लिंकेज, ऋण सुविधा तथा दो वर्षों तक हैंडहोल्डिंग सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार स्थापित करने में भी सहयोग करता है। उन्होंने बताया कि अगरबत्ती एवं साबुन निर्माण जैसे लघु उद्योगों के माध्यम से प्रशिक्षित व्यक्ति प्रतिमाह लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं।
राज्य में कौशल विकास एवं पुनर्वास आधारित ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों को नई दिशा देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

 

 

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